अपना ब्लॉग जोड़ें

अपने ब्लॉग को  जोड़ने के लिये नीचे दिए हुए टेक्स्ट बॉक्स में अपने ब्लॉग का पता भरें!
आप नए उपयोगकर्ता हैं?
अब सदस्य बनें
सदस्य बनें
क्या आप नया ब्लॉग बनाना चाहते हैं?
हमारे विषय
नवीनतम सदस्य

नई हलचल

दहशतगर्द

तुमस्कूल जाते बच्चों केबस्तों मेंभर दोगे बारूदपरियों की कहानियों वालीकिताबों की जगह।उनके नन्हे-मुन्ने हाथों मेंपकड़ा दोगेबंदूकें,कलम की जगह ।इमले की जगहउनकी तख्ती परलिख दोगे इबारतआतंक क...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
67

विस्मृति

पूर्वज,चौराहों पर लगे,कौओं और कबूतरों कीबीट से लिथड़ेतुम्हारे बुत।तुम्हारी विस्मृति केस्मृति-चिह्न ।...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
70

भरे पेट का ज्ञानयोग...

भरा पेट खाली पेट पर आसन जमायेपास रखी रोटी को पाने कीअसफ़ल कोशिश कर रहेखाली पेट से कहता हैरोटी तक पहुँचने काआसान रास्ता न चुनो मित्रभूख पर विजय हीहमारे स्वर्णिम भविष्य...भविष्य शब्द पर अचानक भर...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
95

ग़ज़ल

ग़ज़ल पढ़ने के लिए ग़ज़ल पर क्लिक करें......  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
83

इन्द्र धनुष

मुंडेर से उतर करधूपबरांडे केदूर वाले छोर परअटक जाती है।न जाने क्यों ?घिर जाता है मनएक उदास खामोशी से।सुगन्धि का एक वलयतैर जाता हैआंखों के आगेयादों का इन्द्र धनुषखिंच जाता हैमन के एक सिरे सेद...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
71

अमर शहीद नवाब अब्दुर्रहमान खां को सलाम

पेशकश : सरफ़राज़ खान1857 की जंगे-आज़ादी में हरियाणा का भी अहम योगदान रहा है। जंगे-आज़ादी का बिगुल बजते ही झज्जर के नवाब अब्दुर्रहमान ख़ां ने भी अपने देश को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराने के लिए तलवा...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
86

आम आदमी की कविता

वह अधनंगा,मरियल सा आदमीजो अभी-अभीतुम्हारी विदेशी कार केनीचे आते आते बचा है।और जिसके बारे मेंसोच रहे हो तुमकि क्यों बनाता है ऊपर वालाऐसे जाहिलों को,नहीं है जिन्हें तमीजठीक से सड़क पर चलने तक क...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
72

आतंकवाद का महिमा मंडन कब तक ?

आतंक का नंगा नाच जारी है कब कहाँ बम फट जाए कुछ नही कहा जा सकता आतंकवादी पूरे देश में खून की होली खेल रहे हैं जैसे ही कहीं बम फटता है मीडिया का पूरा लाव लश्कर वहां पहुँच जाता है। उसके बाद टीवी के द...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
prakash govind
81

गेट वेल सून ..... राज मामू

अभीजबचीनमेंओलम्पिकहोरहाथातोभारतसेकाफ़ीलोगगएथे , जिसमेअनेकमीडियाकर्मीभीशामिलथेवहांभारतीयभोजनकीकाफ़ीदिक्कतथी, कुछहोशियारलोगोंनेइन्टरनेटकीमददलीऔरवहांभीऐसेदर्जनोंरेस्ट्रोरेन्...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
prakash govind
78

एक ग़ज़ल मेरे शहर के नाम

आख़िर बदइंतजामियों की कोई इन्तिहाँ तो हो।मेरे शहर के हाल पर कोई तप्सरा तो हो।गड्ढों में सड़क गुम हैं, सीवर उफ़ान पर,हाकिम को इंतज़ार कोई हादसा तो हो।बदलेगा ये निजाम भी हर दौर की तरह,सीनों में आग, ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
66

हाय मीडिया

यहकितने शर्म की बात है भारत में टी वी के चैनल्स पर जिन फूहड़ और ऊलजलूल चीजों को समाचार के नाम पर परोसा जा रहा है उनका विरोध उतना नही हो रहा है जितना होना चाहिए. जब हम दूसरे देशों के चैनल्स को देखत...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
prakash govind
81

नई तहजीब

नंगापननया मंत्र हैसभ्यता का।स्वतंत्रता और स्वच्छंदताहैं गडमड।विचार करना है पिछड़ापनसोचना छोड़ो।कपड़े उतार डालोअपने नहीं तो दूसरों के।नंगे हो जाओयही है आज की मांग।नंगापनविचार में,भाषा में,...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
63

शब्द सन्दर्भ

शब्दसांत्वना और संवेदना कीरसधार से संपृक्तस्नेह और पीड़ा केआदिगीत,मास्टर जी की बेंत और अम्मा की लोरी से अभिमंत्रित,सीपियों और कंचों से निर्मल जगमग शब्द। प्रेमपत्रों से आती मेहंदी की सुगंध म...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
72

मुंडेर के पंछी

हर सालगर्मियां शुरू होते हीनानी लटका देती थीमुंडेर सेमिट्टी की हंडियाभर कर जल से। नहीं भूलती थीडालना रोज पानीहंडिया मेंशालिग्राम का भोग लगाने के पश्चात,संभवतः यह भी था एक हिस्सा उनकी पूजा ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
75

दंगा

न जाने कबगरमा उठती हैपुरवैया,धुप की मखमली उजास न जाने कब बदल जाती है आग की पगडंडी में उबलने लगती है नदी पिघल कर बह उठते है किनारे उत्तप्त हो लावा की तरह। लहू की एक अग्निरेखा प्रवेश कर जाती है आत...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
71

युध्द

जब भी तुममौन रहोगेअन्याय के प्रतिकार में ,अपनी आत्मचेतना के बिरुद्धरुक जाओगेराजसत्ता के पायों से बाँध कर ।होगे तुम उपहास के पात्र मात्र।महारथीजब जब तुम होगेअन्याय के साथ,अपनी वैभवपूर्ण वी...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
68

पत्थर

१-छूकर जिसे अपने माथे सेबना दिया मैने ईश्वर, उसी पत्थर की जद में है आज मेरा सर। २-पत्थरों का घर बनाने वालों की किस्मत में होते नहीं घर पत्थर के। ३-लगे तो थे पत्थर हम दोनों को ही पर शायद मेरे माथे प...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
70

अक्स

तमाम उम्र सितारों का तलबगार रहा,हरेक शख्स ख्वाहिसात का शिकार रहा।हुस्न की धूप ढली जिस्म के मौसम बदले,आइना कितने हादसों का हमकिनार रहा।उसे ही आया नहीं मेरी वफाओं का यकीन,मुझे तो उसकी ज़फाओं का ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
80

तुम्हारे फूल

तुम्हारे फूलतुम्हारे फूलों ने जबमेरी सुबह की पहली साँसें महकायींमैंने चाहा था,उसी वक्त तितली बन जाऊँमंडराऊँ खूबउन ख़ुशबू भरे खिलखिलाते रंगों परबहकूँ सारा दिन उसी की महक सेमहकूँ सारी रात उस...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
61

विश्वास के हिमालय से सारी बर्फ पिघल चुकी

संसद में दो दिनी अप्रिय शोरगुल के बाद देश में हृदयभेदी सन्नाटा है। सब कुछ एकदम से खामोश है- सिवाय कुछ दलों में जयचंद चिन्हित और घोषित कर उन्हें पार्टी बदर करने के, कोई बड़ी उल्लेखनीय हरकतें नह...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
81

मंगल का हो गया मुंह काला

मंगल का मुंह काला आखिर कर ही डाला। यही तो मैंने चार दिन पहले लिखा था। आपने भी लिखा था। सबने यही लिखा था। सबको अंदेशा था। होता क्यों नहीं? जो हो रहा था, उसे तो होकर रहना ही था। अब आप क्या करेंगे? दो ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
84

बारिश की एक बूंद और हजार अर्थ

भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मानसून मेहमान की तरह है। एक ऐसा मेहमान जिसके आगमन का सभी को बेसब्र इन्तजार रहता है। अक्सर इसकी देरी जनमानस को बेचैन कर देती है। इसको लेकर उनकी अत्कंठा छुपाए नहीं ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
70

दिल्ली के आसमान में ये कैसे बादलों का जमावड़ा?

देश में जितनी भी दिशाएं हैं, सभी से इस समय बादलों का रुख दिल्ली की ओर है। हर छोटा, मोटा, धूल-धूसरित, मैला, मटमैला, छोटा, बड़ा बादल कुछ सशंकित सी मुद्रा लिए राजधानी की ओर डायवर्ट है। अवसरवादिता क...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
64

शब्दों के हथियारों से मुंह तोड़ने की निरर्थक कवायद

हम आतंकवाद के आगे नहीं झुकेंगे। कोई ताकत हमारे मंसूबों को विफल नहीं कर सकती। कितने ही हमले हमें हमारे मिशन में नाकामयाब नहीं कर सकते। पड़ौसी देशों को मदद जारी रखेंगे। हम आतंकी घटनाओं का मुंह...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
60

हिसाब मांगती एक-एक सीढ़ी

बारी-बारी से सत्ता का मधुपान कर, पूरी तरह रस निचोड़ जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बेमन से राजभवन की ओर जा रहे हैं। (अलबत्ता पहुंच चुके) पांव भारी हैं। जेब में इस्तीफा पड़ा है। बोझ से पग डगमगा रहे ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
61

रोम जला, नीरो ने बजाई बांसुरी

जब रोम जल रहा था, तब नीरो बांसुरी बजा रहा था। नीरो ने गलत क्या किया? जिस बेसुरी बांसुरी में फटे सुर निकलें, उसे और किस मौके पर बजाया जा सकता है। कम से कम ऐसे मौके के बहाने बांसुरी को लोगों ने देखा ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
58

बेहिसाब, बेसाख्ता, नौटंकी जारी है... देखते रहिए

इस समय देश में अजीब सी खामोशी है और सन्नाटे का हृदयभेदी शोर है। देश के आकाश में मानसूनी कम, किसी अनिष्ट की आशंका के बादल ज्यादा तैर रहे हैं। सियासत में बेतुके फैसलों की घड़ी है। कई पार्टियों के ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
61

जाणता राजा (राजा सब जानता है)

कल रात जयपुर के सूरज मैदान में जाणता राजा देखा। जाणता राजा अर्थात राजा सब जानता है। यह छत्रपति महाराज शिवाजी पर बाबा साहिब पुरन्दरी लिखित भव्य नाटक है। इसमें शिवाजी की हिन्दवी स्वराज की कल्प...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
64

हर्षाने का सुख, मुर्झा जाने तक

इस देश में मानसून का आना खुशियों का प्रतीक माना जाता है। इस दफा ये खुशियां ज्यादा देर तक कायम न रह सकें, शायद। आसमान से टप-टप पानी गिरेगा, लेकिन ज्यादा शोर भाषणों का होगा। रिमझिम बारिश के साथ सु...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
66

ट्रेन टु विलेज-२

(मेरी गांव यात्रा) परसों गांव जाने के अपने अनुभव शेयर कर रहा था। कुछ ब्लॉगर साथियों ने टिप्पणियां भेजीं। लगा, सफलता की कहानी कहीं भी गढ़ ली जाए भले, स्मृतियों से गांव कभी छूट नहीं सकता। शहरों म...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
69


Postcard
फेसबुक द्वारा लॉगिन