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नई हलचल

साथ होकर भी दूर

संजयकुंदन॥भारतीय दांपत्य जीवन की एक विचित्र बात यह है कि यहां पति-पत्नी में संवाद बड़ा कम होता है। गांवों में तो कुछ ऐसे पुराने जोड़े भी मिल सकते हैं, जिनमें जीवन भर एक-दो जरूरी वाक्यों को छोड...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
bhagirath
ज्ञानसिंधु
54

रहस्य दर रहस्य

रहस्यरहस्य? हाँ, रहस्य . एक मुबी देखी। नाम था रहस्य। विदेशी दार्शनिकों, चिंतकों, लेखकों के अनुभव पर आधारित है रहस्य। नहीं लगा उसमें कुछ नया है। जो बताया व दिखाया गया, वह देशी शराब की बोतल पर लगा अ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Acharya Devesh  awasthi (Devesh Shastri)
9

रोजगार

हर रात बिस्तर से आस लगता हूँकि कल सवेरा ना होऔर मैं ता उम्र या इसके बाद भीगहरी नींद में सो जाऊं तो फिक्र ही न होगी मेरे आने वाले वर्तमान किऔर नाही चिंता सताती मेरी शेष बचे अभिमान कीपर यह संभव तो ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Kshitij Ranjan
क्षितिज
79

मेरा शहर

हैं लोग हर तरह के कहते मेरे शहर में बदन लौह है दिल मोम रखते मेरे शहर में हर ओर हरियाली , खुशहाली संग में सब मिलके बस्तियां बनाते मेरे शहर में हर कौम से अलग मजहब है हमारा हैं पाठ प्यार का पढ़ाते मे...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
sidharth sarthi
सारथी...
76

किसी की जिंदगी को बचाने से बड़ा पुण्य भला क्या हो सकता है !

मनोज जैसवाल : किसी की जिंदगी को बचाने से बड़ा पुण्य भला क्या हो सकता है शायद इसीलिए लोग ब्लड डोनेट करके एक अलग तरह का संतोष महसूस करते हैं। कोई भी सेहतमंद शख्स ब्लड डोनेट कर सकता है क्योंकि इस...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
manojjaiswalpbt
मजेदार दुनियाँ
84

मानवता

आज तथाकथित कवि मानते हैं - कविता का ह्रास हो रहा रहा। जरा सोचिये कविता है क्या? सत्ता,मानवता, पशुता, दानवता आदि ता प्रत्यय के अनगिनत शब्दोंकी श्रेणी में कविता भी है। बात करते है मानवता की- मानवत...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Acharya Devesh  awasthi (Devesh Shastri)
7

कम उम्र में 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' प्राप्त कर अक्षिता (पाखी) ने बनाया कीर्तिमान

आज के आधुनिक दौर में बच्चों का सृजनात्मक दायरा बढ़ रहा है. वे न सिर्फ देश के भविष्य हैं, बल्कि हमारे देश के विकास और समृद्धि के संवाहक भी. जीवन के हर क्षेत्र में वे अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहे है...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
20

बिहार प्रगतिशील लेखक संघ का 14 वाँ राज्य सम्मेलन ... जुटेंगे साहित्यकार ।

बिहार प्रगतिशील लेखक संघ की पूर्णिया इकाई के प्रस्ताव पर दिनांक 11 एवं 12 फरवरी (रविवार) को बिहार प्रगतिशील लेखक संघ का 14 वाँ राज्य सम्मेलन पूर्णिया में संयोजित होने जा रहा है। जिसमें प्रलेस के र...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
- अरविन्द श्रीवास्तव
73

"मयंक की पुस्तकों का विमोचन"

      14 नवम्बर, 2011 कोबालदिवस के अवसर परखटीमा पब्लिक स्कूल एशोसियेसन के द्वारा एक विशाल बाल मेले का आयोजन किया गया। जिसमें एशोसियेसन से जुड़े 53 विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा रंगा-रं...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
120

तो चले जाना...

कुछ देर ज़रा रुक जाओ,थोड़ा सुकूं आने दोदिल को ठंडक मिल जाए,तो चले जाना...आंख भर आने दो,धड़कने बढ़ जाने दोरूह में करार आए,तो चले जाना...तेरे दिल से जो निकली,उस आह को छूने दोहर दर्द दिल में उतर जाए,तो च...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
parul chandra
30

कृष्ण जी की सेवा में आधुनिक तकनीक (Modern Technology in the service of Lord Krishna)

सब कुछ संभव है भगवान की सृष्टि में, मॉर्डन टेक्नोलोजी भी भगवान की सृष्टि है, और भगवान की सृष्टि है भौतिक प्रकृति हवा, जल, पहाड़, भूमि हम सब भगवान की सृष्टि है। लेकिन वास्तव में यह टेक्नोलोजी भी भग...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
विवेक रस्तोगी
हरे कृष्णा
134

दर्द

 ... कुछ रोज पहले हीजिया था मैंने तुझकोअपनी साँसों को कर दिया थानाम तेरेमेरा दिल धड़कने लगा थातेरी ही धड़कनों सेकर ही दिए थे बन्दसभी दर-ओ-दीवार बेजारी केबस तेरी ही महक सेकर लिया था सरोबारवजूद ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
सु-मन (Suman Kapoor)
बावरा मन
59

अपनी मर्जी से जीने की , अर्जी क्यों दूँ ?

आज , बहुत दिनों बाद आप सब से रूबरू हूँ | इन दिनों , लिखने की कुछ मर्जी ही नहीं हुई | विचारों की मर्जी नहीं हुई की वो मुझ तक आये और ना भावों की मर्जी हुई की वो मन की दहलीजों को छुए | तो कोई कैसे लिखे ? स...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
mamta vyas
मनवा
71

अभिव्यक्ति की नई क्रांति यानी हिन्दी ब्लॉगिंग का वैश्विक हस्तक्षेप

पुस्तकः हिंदी ब्लॉगिंग अभिव्यक्ति की नई क्रांति/ संपादकः अविनाश वाचस्पति और रवीन्द्र प्रभात /प्रकाशकः हिन्दी साहित्य निकेतन, बिजनौर (उ.प्र)/ मूल्य- 495/(चार सौ पिचानवे ) रुपए /प्रथम संस्करणः 2011.वर...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
15

बाल दिवस पर विशेष

हर साल 14 नवम्बर को बाल दिवस के रूप में मनाया ज़ाता है . हमारे देश कि सबसे बड़ी ख़ास बात ये है कि यहाँ नियम क़ानून तो हर चीज़ के लिए बने है पर उनको फोलो करने वाले बहुत ही कम है और कितना फोलो किया ज़ात...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Manoj
डायनामिक
67

‘हिंदी साहित्य निकेतन शोध पुरस्कार’ की घोषणा

हिंदी साहित्य निकेतन देश का ऐसा विशिष्ट संस्थान है, जो हिंदी शोध की दिशा मेंविशेष रूप से सक्रिय है। इस संस्थान ने अभी तक हिंदी में संपन्न शोध की पूरीसूचनाएँ लगभग 3000 पृष्ठों के पाँच खंडों में ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
36

दोस्तों, शराब दवा से नहीं छूटेगी,....

मनोज जैसवाल : शारीरिक या मानसिक रूप से जब कोई किसी खास चीज पर निर्भर हो जाता है, तो उस स्थिति को अडिक्शन (लत) कहते हैं। अडिक्शन का क्षेत्र बेहद विस्तृत है, जिसमें शराब से लेकर तंबाकू, हेरोइन या द...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
manojjaiswalpbt
मजेदार दुनियाँ
103

राहुल को सलाहकार की ज़रूरत है...फ़िरदौस ख़ान

फ़िरदौस ख़ानकांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को एक ऐसे सलाहकार की ज़रूरत है, जो उनके लिए समर्पित हो और उन्हें वो सलाह दे सके, जिसकी उन्हें ज़रूरत है... क्योंकि आज उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद क...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
मेरी डायरी
59

चौंथा अंतरराष्ट्रीय हिन्दी समारोह बैंकाक में

रायपुर । वरिष्ठ कवि व 'दुनिया इन दिनों' के प्रधान संपादक डॉ. सुधीर सक्सेना, भोपाल को उनकी कविता संग्रह 'रात जब चंद्रमा बजाता है' तथा स्त्री विमर्श के लिए प्रतिबद्ध लेखिका व आउटलुक, हिन्दी की सहा...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
25

मुझे उसकी आँखे याद आती हैं टिमटिमाते तारो जैसी ...सुनहली रश्मियों जैसे उसके बाल ...कोयल की कुँक..सुरसती  के गान सी मधुर उसकी बोली और उसकी बातें ....कभी कृष्ण की गीता ..कभी माँ की ममता कभी धुआ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Dr.Radhika Budhkar
आरोही
14

रंग भरने का जी करता है

इश्क में डूबे दिल को कहाँ सुकून रहता हैवो तो जाने कितने वहमों से भरा रहता हैये महफ़िल भी बहाना है, क्या रखा इसमेंहर बार ही तेरे आने का इंतज़ार रहता हैसड़क की चहल-पहल से शहर नहीं बसतेये ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Shankar M
Thoughtscroll
67

आया बाल दिवस मुबारक हो तुमको .

मम्मी ने सुबह जगाकर कहा पापा ने गलेलगाकर कहा दादा ने टॉफी देकर कहा दादी ने गोद बिठाकर कहा आया बाल दिवस ;मुबारक हो तुमको .तुम हो आशाओं के दिएँकुछ न मुश्किल  तुम्हारे लिए जो सपने 'चा...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
मेरा आपका प्यारा ब्लॉग
69

एक चाहत थी...

एक चाहत थी,तुमसे मिलने की...गर पूरी हो पाती तो...एक चाहत थी,तेरे संग कुछ वक़्त साथ बिताने की...गर पूरी हो पाती तो...एक चाहत थी,तेरे संग हंसने गाने की...गर पूरी हो पाती तो...एक चाहत थी,तेरी हर ख़ुशी - ओ - गम म...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Mahesh Barmate
माही....
115

अब गोरैया नहीं दिखती

बचपन के दिन भी क्या दिन थे जब गोरैया की चहचहाहट से सुबह की नींद खुलती थी.गांवों,घरों के आँगन में यह छोटी सी चिड़िया सहज ही नजर आ जाती थी.प्रायः फूस के घरों में गोरैया का घोंसला होता था.शहरों के आस-...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
राजीव कुमार झा
61

इससे पहले कि लौह-कपाट बन्द हो …

इससे पहले किमेरे हौसले मन्द हों;इससे पहले कि लौह-कपाट बन्द हो मैं प्रवेश कर जाना चाहता हूँउस तिलिस्मी दुनिया में ।मुझे पता हैएक बार जाने के बाद लौट पाना मुश्किल है; मुझे पता हैपग-पग पर तैनात है...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
M Verma
जज़्बात
77
उसका सच
87

हार

 अपनी हर में भी बड़ा सुकून था फराज उसने गले लगाया जीतने के बाद ....  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
rakesh jain
आउट आफ़ बाक्स
72

ए जिंदगी ये खेल कैसा है

“न तू मेरे न मै तेरे काबू में,ए जिंदगी ये खेल कैसा है।“वक्त की कहानी दिल पे लिखी गयी,ऐ खुदा तेरा ये अन्दाज़ कैसा है।“शाम तक कुछ पता न चला कहाँ हूँ,जिंदगी तेरी सहर का सूरज कैसा है।“वो आये तो अंदाज क...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
vivek mishra
19

ऊर्जा बचाने में अब ये चिप आपकी मदद करेगी

ऊर्जा का बढता प्रयोग आज हमारे जीवन का एक अहम् हिस्सा बन गया है . हमारे दैनिक जीवन के अधिकतर काम आज के समय में बिजली से चलने वाले यंत्रो की मदद से किये जाते है.इसलिए ऊर्जा का अपना एक विशेष महत्व ह...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Manoj
डायनामिक
42

रचनाकार: भूपेन हजारिका की जीवनी : दिल हूम हूम करे

रचनाकार: भूपेन हजारिका की जीवनी : दिल हूम हूम करे...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
sakhi
sakhi with feelings..kahaniya/Articles
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