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कुछ पुरानी यादें... (कविताएं, गीत, भजन, प्रार्थनाएं, श्लोक, अनूदित रचनाएं)
107

खिड़कियाँ खोल झाँक रहा है मकान ….

इससे पहले कि’शब्द’ शब्दों से मिलकरबुन दें एक अभेद्य तिलिस्म, तुम लिखो एक खतशब्दों के बिना ।.तत्पर हैं संवादों के आखेटक; बनाने को इनकोविस्फोटक,खिड़कियाँ खोल झाँक रहा हैहर मकान; तैनात किए गए है स...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
M Verma
जज़्बात
80

बचपन की सीख

बचपन की सीखवे दिन भी कितने सुहाने होते हैं, जबजिम्मेदारी नाम की चिड़िया दूर दूर तक भी नजर नहीं आती. सुबह उठो, नहओ धोओ, नाश्ताकरो, होम वर्क करो. फिर स्कूल जाओ, क्लासमें पढाई और फुरसत में शरारतें कर...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
रंगराज अयंगर
59

बेरंग जिंदगी

क्यूँ जिंदगी हमसे आँख मिचोली करती है      सुबह खुशी में खिलकर क्यूँ शाम गम में ढलती हैकहते हैं जिंदगी हर पल रंग बदलती है            फिर क्यूँ हमें तस्वीर इसकी बेरंग सी झलकती ह...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
सु-मन (Suman Kapoor)
अर्पित ‘सुमन’
74

तलाश

जब भी होती हो आस पास तुझे देखने की रहती है प्यास नज़रें सख्त चट्टान साथ करती है दीदार साँस दर साँस पलकों का पीछा करते गीरे जैसे आकाश और उस अँधेरे में ख्याल है तेरा खास और उठे तो खोले खजाने ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Kshitij Ranjan
क्षितिज
83

भावभीनी श्रधांजलि भूपेन हजारिका जी को

ओ गंगा बहती हो क्यों ............................विस्तार है अपार, प्रजा दोनो पार, करे हाहाकार, निःशब्द सदा, ओ गंगा तुम, ओ गंगा तुम. .. ओ गंगा… बहती हो क्यूँ ..नैतिकता नष्ट हुई, मानवता भ्रष्ट हुई, निर्लज्ज भाव से बहती ह...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
sakhi
sakhi with feelings..kahaniya/Articles
115

प्यारी तितली ;

                    रंग बिरंगी ,नीली -पीलीचंचल ,चपल -थिरकती तितली ;                   फूल के ऊपर छतरी बनकरनाच रही है प्यारी तितली ;                   टिंकू, मिंकू , पिंकी...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
मेरा आपका प्यारा ब्लॉग
77

" भगवान के घर देर है, अन्धेर नहीं!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

डी.आई.जी. - डी.डी.मिश्र    भ्रष्टाचार के मुद्दे पर डी.आई.जी. - डी.डी.मिश्र ने अपनी जबान खोली तो सत्ताधीशों ने उनकी मानसिक स्थिति खराब बताकर उन्हें जबरन मानसिक चिकित्सालय में भर्ती करवा दिया।य...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
67

“ढक्कन वाली रोटी” की याद...

अररिया में अपनी बड़ी दीदी के अलावे एक कौशल्या दीदी भी रहती है, जो बरहरवा में मेरे मुहल्ले की ही है तथा मेरी छोटी दीदी की सहेली है। जब उन्होंने गाय ली, तो मैं उनके यहाँ से दूध लेने लगा था। यह पिछले...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
जयदीप शेखर
कभी-कभार
59

"एक अद्भुत संसार - 'नन्हें सुमन'" (समीर लाल 'समीर')

मित्रों!      गतवर्ष बाल कविताओं की मेरी प्रथम बालकृति 'नन्हे सुमन' के नाम से प्रकाशित हुई थी। उन दिनों हिन्दी ब्लॉगिंग के पुरोधा आदरणीय समीर लाल 'समीर' भारत आये हुए थे। दूरभाष पर बातें हुईं ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
103

"कविता के सुख का सूरज" (डॉ. सिद्धेश्वर सिंह)

       डॉ. सिद्धेश्वर सिंह हिन्दी साहित्य और ब्लॉग की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम है। जब कभी विद्वता की बात चलती है तो डॉ. सिद्धेश्वर सिंह को कभी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। कर्मनाशा ब्...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
299

बिन ’सारथी’ रथ को नज़र नहीं होता

गर तेरी शोख निगाहों का कहर नहीं होतामेरी जिन्दगी में ऐ दोस्त सहर नहीं होताअब फ़क़्त दुआओं का ही दौर चलने दोदवाओं का अब क्योंकर असर नहीं होतायूँ तो हर वक़्त मिलने की बात करते होक्यों उन बातों प...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
sidharth sarthi
सारथी...
69

साजिशों से बनी दीवारें ...

कभी सर्द हवाओं;तो कभी गर्म थपेड़ों के बहानेउसके इर्द-गिर्द खड़ी कर दी गई बिना छत की दीवारें । वह विभेद करता रहा, उन दीवारों से कान सटाकरअट्टहास और चीत्कार में ।अक्सर रात मेंउसे दिखाये गयेचमकदार ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
M Verma
जज़्बात
90

तेल के खेल में सरकार आउट

तेल के खेल में सरकार आउटकिसी भी उत्पाद के दाम तब ही बडते है जब उत्पाद का नया प्रिंट बाज़ार में आता है ऐसा कभी नहीं होता है और न ही कोई कर सकता है की पुराने प्रिंटेड दाम पर नई कीमत ले ले ..लेकिन एक ब...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Ashish
कानपुर पत्रिका
58

ये सच्चाई है..

कुछ चीजें अनायास ही सामने आ जाती हैंजो अहसास करा जाती हैं वास्तविकता काबताती हैं कि आज जो हम हैं कल वो नहीं होंगेये लड़कपन आज का, कल झुर्रियों में बदल जाएगामजबूरी कभी, सठियाना कभी, तो कभी बुढ़ा...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
parul chandra
35

"खीरा होता है गुणकारी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

सूरत इसकी कितनी प्यारी।खीरा होता है गुणकारी।।हरा-भरा है और मुलायम।सबका मोह रहा है यह मन।।छीलो-काटो नमक लगा लो। नींबू का थोड़ा रस डालो।।भूख बढ़ाता, गैस हटाता।बीमारी को दूर भगाता।।चाहे तो रा...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
130

Love Affair ...........!!!

7 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
MY PHOTOGRAPHIC ROMANCE
137

काकड़ (बार्किंग डियर)

आज हम बात करते हैं कॉर्बेट में पाए जाने वाले चौथे हिरन की प्रजाति के बारे में जिसे हम काकड़ के नाम से जानते हैं. मैं आपको फिर कहना चाहूँगा कि यह सारी जानकारी वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के अधि...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
ATUL WAGHMARE
0

काकड़ (बार्किंग डियर)

आज हम बात करते हैं कॉर्बेट में पाए जाने वाले चौथे हिरन की प्रजाति के बारे में जिसे हम काकड़ के नाम से जानते हैं. मैं आपको फिर कहना चाहूँगा कि यह सारी जानकारी वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के अधि...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
corbettnews
कॉर्बेट न्यूज़
73

प्रेम

न्याय, वैशेषिक, सांख्य होया योग मीमांसावेदांत जैसे वैदिक दर्शनघुस टटोला।इन्हें नकारने वाले...चार्वाक, जैन, वैभाषिकसौत्रांतिक, योगाचार औरमाध्यमिक जैसेअवैदिक दर्शन की पनाह भी लीकिंतु मिला न...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
amitabh shrivastava
अमिताभ
78
उसका सच
75

DROP of LIFE ...!!

7 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
MY PHOTOGRAPHIC ROMANCE
115

बहुत दिनों के बाद... आज

बहुत दिनों के बाद...आसमां फिर नीला-नीला है,तारों भरा चमकीला है, आज, बहुत  दिनों के बाद...बहुत दिनों के बाद...बादल हैं छंट चुके, टुकड़ों में बंट चुके, आज...बहुत दिनों के बाद...पेड़ हैं हरे-हरे,फूलों से भर...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Ritika Rastogi
फुर्सत के पल..
123
उसका सच
83

आज के रावण

आज के रावणरामचंद्र जी मार चुके हैं,त्रेतायुग में रावण को,आज रावणी मार रही है,कल युग में भी जन जन को.सीताहरण पर श्रीराम ने,रावण को मार गिराया है,खुशियाँ मनाने हर वर्ष ,जनता ने रावण को जलाया है.बचप...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
रंगराज अयंगर
65

अपनी मिटटी

अपनी मिटटी के लिए तड़प क्या होती है ?बिछड़ने के बाद जान पाएउन्हें सलाम, जो वही रहे हम तो भाई नकली हो गएउन हवाओं को सलाम जो उस मिटटी को छू कर आये इन हवाओं में वह खुशबू कहाँ !ये तो दूषित और नकली है उस ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
vinay
My Thoughts
29

भारत and FORMULA ONE RACES..!!!!!

    आज भारत में एक ऐतिहासिक दिन का पदार्पण हो चुका है यहाँ मेरा इशारा  FORMULA ONE कार रेसों  की ओर है... .....जी हाँ आज से भारत जैसे विकास शील देश ने भी FORMULA ONE रेसों  का सफल आ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Dolly Bansiwar
चर्चित विषय
78

चिट्ठी न कोई सन्देश

दिवंगत जगजीत सिंह की यह चर्चित गज़ल आज के सन्दर्भ में मौजूं है.क्या आपको याद है कि आपने आखिरी बार कब कोई चिट्ठी लिखी थी?नहीं! न.शायद होगी भी नहीं. अब चिट्ठी,पत्री या डाकिया घर पर नहीं आता.लोग चिट...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
राजीव कुमार झा
70

वटवृक्ष पत्रिका पर प्रकाशित मेरी रचना

मैं आभारी हूँ रविन्द्र प्रभात जी और वटवृक्ष की पूरी टीम की जिन्होंने मेरी रचना को पत्रिका में स्थान दिया .....तेरा अहसास........‘मन’ मेरेतेरा अहसास.....‘मन’ मेरे मेरे वजूद को सम्पूर्ण बना देता हैऔर मै...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
सु-मन (Suman Kapoor)
बावरा मन
53


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