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नई हलचल

नयी पौध की नीम के पेड़ पर अर्द्धनारीश्वर चर्चा

अंतरतम से और सर्वत्र से संवाद अल्केमिस्ट में वृद्ध पाउलो कोएलो भी चाहते हैं और जवान चेतन भगत भी. one night @call centre में चेतन भगत inner call की बात करते हैं. सरल इंग्लिश में लिखी गयी किताब, प्रवाहमयी. पर ९०% किताब...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
65

गांधी और मैं -रोहित पाण्डेय

[...जबसे होश सम्हाला है...गांधी की चर्चा सुनी है तो गांधी सबके हैं, सबके भीतर...पर क्या वाकई सबके भीतर हैं...? तो सबसे पहले मैंने खुद को टटोला..और जो पाया वो लिखा था  "गांधी और मै"शीर्षक से..अब बारी है श्...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
75

क्या हम कभी इतने 'सभ्य' नहीं रहे कि 'हाशिया' ही ना रहे...?

आज दीवाली है, खासा अकेला हूँ. सोचता हूँ, ये दीवाली, किनके लिए है, किनके लिए नहीं. एक लड़की जो फुलझड़ियॉ खरीद रही है, दूसरी बेच रही है, एक को 'खुशी' शायद खरीद लेने पर भी ना मिले, और दूसरी को भी 'खुशी' शाय...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
58

इस दीवाली एक सदाग्रह..

सदाग्रह इस दीवाली आप सभी से अपील करता है..१. मोमबत्ती नहीं दीप जलाएं. २. पटाखों में मितव्ययिता बरतें. ३. अपने आस-पास के वातावरण को स्वच्छ बनायें. ४. इस दीवाली पर अपना पर्यावरण प्रेम व्यक्त करें. ५. ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
83

जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना...

स‌च कहूं तो त्योहारों को लेकर मैं कोई खास उत्साहित नहीं रहता। त्योहार वाला दिन मेरे लिए आम दिनों जैसा ही होता है। घर पर टीवी देखना या इंटरनेट पर वक्त बिताना ज्यादा अच्छा लगता है। पूजा-पाठ, पटा...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
82

शुभ दीपावली

दीवाली के दिन पूजन का विशेष महव है. गणेश जी , लक्ष्मी जी और सरस्वती जी की पूजा अर्चना कर लोग धन, सुख समृद्धि, बुद्धि और ज्ञान प्राप्ति की कामना करते हैं। विधिवत पूजा करने में आनंद भी है और संतोष ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Chetna Vardhan
bas do minute
119

"सर्वत्र" से संवाद

JNU में राजनीतिक जागरूकता जबरदस्त है, ऐसा शायद ही भारत में किसी और कैम्पस में हो...तो इसमे खास बात क्या है..? खास ये है कि यहाँ आपको अपने व्यक्तिगत राजनीतिक अधिकारों के लिए जरूरी नहीं कि आप किसी खास ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
60

दीया, तुम जलना..

दीवाली पर अभी तुरत लिखी एक छोटी कविता.जो जीवन देकर उजाला देता है, उससे की मैंने विनती....दीया, तुम जलना..  अंतरतम का मालिन्य मिटाना विद्युत-स्फूर्त ले आना.  दीया, तुम जलना.  जलना तुम मंदिर-मं...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
52

कैसा लगता है, जब फुटपाथ पर कोई लड़की सिगरेट बेचती है...?

सचमुच एक दृश्य देखा मैंने दिल्ली के फुटपाथ पर...और फिर....कैसा लगता है, जब फुटपाथ पर कोई लड़की सिगरेट बेचती है...? पर यहाँ लड़की अपनी झोपड़ी के पास मजबूत धागों में गुटखे व चट्टे पर सिगरेट, पान, स...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
55

निकल आते हैं आंसू हंसते-हंसते,ये किस गम की कसक है हर खुशी में .

निदा फाज़ली की नज्में कुछ इस तरह चर्चित हैं कि अपने आस-पास साधारण, सामान्य हर तरह का आदमी उनकी पंक्तियाँ कह रहा होता है पर अक्सर सुनाने वाले और सुनने वाले दोनों को ही पता नहीं होता कि ये निदा फा...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
63

चीनी खाने और गन्ना बोकर, चूसने में अंतर है, नायपाल जी.

जे.एन. यू में मेरी पहली anchoring जबरदस्त सराही गयी, माँ शारदा को प्रणाम. प्रो. घोष की रसिकता पर मैंने यूं चुटकी ली : "..बदन होता है, बूढा, दिल की फितरत कब बदलती है, पुराना कूकर क्या सीटी बजाना छोड़ देता है.......  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
67

ये ब्लोगिंग में लाठी-बल्लम...?

ये इतना घमासान क्यूँ....? किसको साबित करना चाहते हैं..? किसके  बरक्श....? ये कौनसी मिसाल आप सब बना रहे हैं..? सब, सब पर फिकरे कस रहे हैं. आये थे, कुछ बांटने, ब्लॉग लिखने, कुछ सीखने, कुछ बताने,...., ये क्या करन...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
67

हिंदी का भूत.........

हिंदी से डर लगता है। डरावनी हो गई है। सीबीएसई अब हिंदी के सवालों को हल्का करने जा रही है। प्राइवेट स्कूल इंग्लिश मीडियम होते हैं। गांव गांव में टाट की झोंपड़ी में इंग्लिश मीडियम स्कूल के बोर्...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Himanshu
आँगन.. जो बाहर होकर भीतर है
77

सदाग्रह..शांति, सद्भावना के लिए....

सदाग्रह एक विमर्श मंच है जहाँ प्रयास होगा विभिन्न समाधानों के लिए एक बौद्धिक पहल का...विमर्श से एक शांतिपूर्ण समाधान की खोज और एक अपील इसे अपनाने की सहभागी बंधुओं से....आपका रचनात्मक सहयोगअपेक...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
60

ek naya template

थोड़ी मेहनत की, एक नया टेम्पलेट...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
74

शायद फ़िक्र हो..

स्मार्ट दूकानदार, मुस्कुराकर, अठन्नी वापस नहीं करता.. शायद फ़िक्र हो.. भिखमंगों की. नये कपड़ों की जरूरत  लगातार बनी रहती है शायद फ़िक्र हो हमें, अधनंगों की.  चीजें कुछ फैशन के लिहाज से पुर...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
62

घर सा घर ... अब कहाँ है घर

'घर' एक वास्तु मात्र न होकर भावसूचक संज्ञा भी है ! घर से अधिक सजीव एवं घर से अधिक निर्जीव भला क्या हो सकता है ! अनगिनत भावनाओं और प्रतीकों का मिला-जुला रूप है घर !"कमरा नंबर एक / जहाँ दो-दो सड़कों के द...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
prakash govind
76

पुनर्पाठ...तुम्हारा..

(१) मै; तुम्हे शिद्दत से चाहता हूँ, पर तुम नहीं. आत्मविश्वास ने समाधान किया: 'सफल हो जाने पर कौन नहीं चाहेगा मुझे,,,? "....पर उन्ही लोगो में पाकर क्या मै चाह सकूँगा ..तब..तुम्हे..?  (२) तुमने जब टटोला तो म...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
55

ब्रेकिंग न्यूज की मजबूरी क्यों?

कुछ दिन पहले कई चैनलों वाले बड़े मीडिया ग्रुप के एक छोटे या फिर कहें मंझोले हिंदी चैनल के संपादक को पढ़ रहा था। वह छोटे और मध्यम श्रेणी के चैनलों की परेशानियां गिना रहे थे। उनका कहना था कि छोटे ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
82
अल्लम्...गल्लम्....बैठ निठ्ठ्लम्...
58

गाँधी मेरी नजरों से..

गाँधी जी जैसा रीयल परसन अपने जन्मदिन पर आपको निष्क्रिय कैसे रहने दे सकता है..? जितना पढ़्ता जाता हूँ गाँधी जी को उतना ही प्रभावित होता जाता हूँ. गाँधी और मै. मेरे लिये गाँधी जी सम्भवत: सबसे पहल...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
64

गाँधी और मै....श्रीश पाठक 'प्रखर'

गाँधी जी जैसा रीयल परसन अपने जन्मदिन पर आपको निष्क्रिय कैसे रहने दे सकता है..? जितना पढ़्ता जाता हूँ गाँधी जी को उतना ही प्रभावित होता जाता हूँ. गाँधी और मै. मेरे लिये गाँधी जी सम्भवत: सबसे पहले स...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
81

ईश्वरत्व से बचते हुए

[...आर्डिनरी जब एक्स्ट्रा-आर्डिनरी बन जाता है, तो वह चमत्कार हो जाता है. महामना गांधी जानते थे कि चमत्कार पर मुग्ध हुआ जा सकता है, पर इसे अपनाया नहीं जा सकता. महात्मा जीवन भर प्रयास करते रहे कि जो ज...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
69

स्वीकारने से कायम होगी सद्भावना

[परिवर्तन शाश्वत हैं और नितांत आवश्यक भी. प्रत्येक पीढ़ी अपने साथ बदलाव का झनकार लाती है. पर इस स्वर में मधुरता का अनुशासन ना हो तो यह कालांतर में अप्रासंगिक हो जाती है. इस बदलाव में जरूरी है कि क...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
87

बैंडिट क्वीन

फिल्म देखा तो स्तब्ध रह गया मै, मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ऐसा हो सकता है. किसी एक जाति की ज्यादती की तो बात ही नहीं है, क्योकि जो भी शीर्ष पर रहा है, उससे ऐसी ज्यादतियां हुई हैं.पर मानवता सबसे कम मान...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
72

सदाग्रह एक अपील...शांति, सद्भावना के लिए..

..जीवन की होड़ में जीवन फिसल जाता है.. हम हिसाब लगाते रह जाते हैं और मोड़ आ जाता है. फिर बदल जाते हैं मायने सब मतलबों के और एक प्याला खाली का खाली ही टूट जाता है. समाधान है हर एक विवाद का, शांतिपूर्...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
94

ए क्या बोलती तू

ए क्या बोलती तू ... , ओ हरे दुपट्टे वाली .... गाने गाकर नायिका को छेड़ते नायक लोगों का मनोरंजन करने मे कितने सफल रहते हैं पर नि:संदेह समाज की एक गंभीर समस्या जरूर उजागर होती है. 'ईव टीज़िंग' नाम से जान...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Chetna Vardhan
bas do minute
147

तो ऐसे होती है दिल्ली में क्रांति, कमाल है!

एक खास विज्ञापन की तलाश में पिछले दो-चार दिन के हिन्दुस्तान टाइम्स के पन्ने पलट रहा था। एक पेज की लीड स्टोरी पर गया। चार-पांच काॅलम में छपी स्टोरी थी, रंगीन फोटो के साथ। फोटो में एक खूबसूरत सी ल...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
73

پاکستان نے دی بھارت کو کراری شکست

سینچورین : چیمپئنزٹرافی کے اہم میچ میں پاکستان نے بھارت کوچون رنز سے ہرا دیا۔سپر اسپورٹس پارک سینچورین میں بھارت نے ٹاس جیت کر پاکستان کو بیٹنگ کرنے کی دعوت دی۔ گرین شرٹس کا آغاز متاثر کن نہ ہوا۔ عمران نذیر بیس، کامران اکمل انیس جبکہ کپتان یونس خان بیس رنز بناکر پویلین واپس لو...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
91

ਸਜਣ ਬਿਨ ਰਾਤੀਂ ਹੋਇਯਾਂ ਵੱਡੀਆਂ

ਸਜਣ ਬਿਨ ਰਾਤੀਂ ਹੋਇਯਾਂ ਵੱਡੀਆਂਰਾਂਝਾ ਜੋਗੀ ਮੈਂ ਜੁਗਿਆਣੀਕਮਲੀ ਕਹਿ-ਕਹਿ ਛਡੀਆਂਮਾਸ ਝੜੇ ਝੜੀ ਪਿੰਜਰ ਹੋਇਯਾਂਕਰਕਨ ਲਗੀਆਂ ਹਡੀਆਂਮੈਂ ਇਆਣੀ ਨੇਹੁੰ ਕੀ ਜਾਣਾਬਿਰਹੁ ਤਣਾਵਾਂ ਕੀ ਗਡੀਆਂਕਹੈ ਹੁਸੈਨ ਫ਼ਕੀਰ ਸਾਂਯੀ ਦਾ ਦਾਵਣ ਤੇਰੇ ਮ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
ਹੀਰ
88


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