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दरोगा जी में जाग उठी ’ देवी ’

माथे पर रोली का लंबा सा टीका लगाए आज उनके मुख की शोभा कुछ अलग सी है। रोजाना के रौब के साथ-साथ एक अनूठा तेज टपक रहा है चेहरे से। जिप्सी की अगली सीट पर बैठे एसओ साहब पूरे एक्शन में हैं। अरे, एक्शन मत...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
73
अल्लम्...गल्लम्....बैठ निठ्ठ्लम्...
63

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश में हिन्दी और इंटरनैट पर संगोष्ठी आज

भाषा विभाग की ज़िला भाषाधिकारी के द्वारा हिमाचल में हिन्दी के इंटरनैट पर प्रचलन के लिए यह पहला सराहनीय प्रयास।अनेक साहित्यकार,पत्रकार और सरकारी कर्मचारी उठाएंगे इस संगोष्ठी का लाभअवसर पर क...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
प्रकाश बादल
प्रकाश बादल
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दाती गुरु का मंतर काम कर रहा है

मदारी की बाजीगरी दिल बहलाती है। लोग सिक्के फेकते हैं। मीडिया की बाजीगरी इससे कहीं गहरी है। व्यापकतर असर रखती है। चैनलों का चलाया दाती गरु का मंतर आजकल दिल्ली में खूब कमाल दिखा रहा है। दाती गु...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
75

दाती गुरु का मंतर काम कर रहा है

मदारी की बाजीगरी दिल बहलाती है। लोग सिक्के फेकते हैंै। मीडिया की बाजीगरी इससे कहीं गहरी है। व्यापकतर असर रखती है। चैनलों का चलाया दाती गरु का मंतर आजकल दिल्ली में खूब कमाल दिखा रहा है। दाती ग...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
79

स‌नसनी बोले तो स‌न्नाटे को चीरते श्रीवर्धन

एंकर श्रीवर्धन त्रिवेदी के बगैर सनसनी के बारे में सोचना भी मुश्किल है। आज की तारीख में सनसनी और श्रीवर्धन एक दूसरे के पूरक बन चुके हैं। कल्पना कीजिए किसी दिन स्टार न्यूज पर सनसनी हो, लेकिन एंक...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
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भारत :बदली आज की तस्वीर

"भारत " का शाब्दिक अर्थ होता है भा से रत यानि प्रकाशवान या चमक से परिपूर्ण।किँतु आज चमक विलुप्त हो रही है हम कहाँ जा रहे है ये प्रश्न आज विचारणीय है,आज का युवा ध्रूमपान ,अन्य वस्तुओँ से इस प्रकार ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
VIVEK SACHAN
khuch bhikhri yaden --कुछ बिखरी यादें
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कंडक्टरों की ये अजब-गजब भाषा

दिल्ली की बसों नगर बसों में सफर करना यूं तो अपने आप में एक यातना है, पर इस यातना में एक मजा भी कहीं छिपा हुआ है। यह मजा है कंडेक्टरों की बोली और चुहलबाजी का। कभी-कभी सोचता हूं कि जाने कब नजर पडे़ग...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
69

समाचार वालों पीछे से निकल लो

दिल्ली की बसों नगर बसों में सफर करना यूं तो अपने आप में एक यातना है, पर इस यातना में एक मजा भी कहीं छिपा हुआ है। यह मजा है कंडेक्टरों की बोली और चुहलबाजी का। कभी-कभी सोचता हूं कि जाने कब नजर पडे़ग...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
72

बच्चे और अनुशासन

बच्चेबड़ेहोनहारहोतेहैं।सबकुछइतनीजल्दीसीखलेतेहैं ,आश्चर्यभीहोताहैऔरगर्वभी।ऐसेहीकुछबच्चोंसेप्रतिदिनमुलाकातहोतीहै।शामकेसमयमुहल्लेकेसारेबच्चेलगभग७-८कीसंख्यामेंखेलते, भागते, कू...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Chetna Vardhan
bas do minute
139

कल दिन भर एक कहानी में

कल रात लिख नहीं पाया. दर असल कल दिन भर एक कहानी में लगा रहा. कहानी तो एक घंटे में ही पूरी हो गयी थी पर दिन भर उसकी खुमारी में रहा. स्वयं क्या मूल्यांकन कर सकूंगा उस कहानी का पर फिर भी पहली बार मै कहा...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
69

आधी रात हो चली है.

आधी रात हो चली है. दिल्ली में झमा-झम बारिश हो रही है. काश के ये बारीश जुलाई-अगस्त में हुई होती तो मेरे पापाजी को कड़ी धूप में खेतों में पानी ना चलवाना पड़ा होता.उनकी तबियत ख़राब हुई सो अलग.JNU के इस ब...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
69

क्या नियम कानून इसीलिए बनाये जाते हैं?

आज सुबह से घर में ग्रिल वर्क चल रहा था .वही घर के चाहरदीवारी को लोहे के छड़ से घेर दिए जाने का काम. मतलब टोटल सुरक्षा। छोटे छोटे शहरों से लेकर बड़े बड़े महानगरों तक दृश्य आम है .कोई नयी बात नहीं। ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Chetna Vardhan
bas do minute
114

Diary

“The life of every man is a diary in which he means to write one story, and writes another; and his humblest hour is when he compares the volume as it is with what he vowed to make it”James Matthew Barrie...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
67

ये मेरी 'प्रखर दैनन्दिनी

जब पहली बार ब्लॉग का कांसेप्ट सुना था तो मन में बात यही बनी थी की यह एक ऑनलाइन डायरी है, पर ब्लॉग बनाया तो सारी लेखनी उड़ेलने का मन हुआ और लिखा हुआ सब कुछ ब्लॉग पर आ गया....आज मन में आया क्यों ना एक ड...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
79

मेरी पहली पोस्ट

लगभग २ वर्षों से ब्लागवाणी नियमित रूप से पढ़ती आ रही हूँ । कितनी बार कोशिश की कुछ लिखा भी जाए , पर असफल ।कुछ अज्ञात सा भय घेरे था ।अब इतनी बड़ी लेखिका तो हूँ नहीं कि राईटर'स ब्लाक की शिकार हो जाऊ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Chetna Vardhan
bas do minute
96

कौन था वह जो मुझे पहचान देकर चल दिया

शायिर: प्रो. ओम 'राज़'कौन था वह जो मुझे पहचान देकर चल दियाबे-रिदा1 तहरीर2 को उन्वान3 देकर चल...[यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
विनय प्रजापति 'नज़र'
ग़ज़लों के खिलते गुलाब
106
70

चिन्ना की शह, मेहरू की मात

मेहरू और चिन्नाबंद कमरे में बैठे थेविभाजन करें या न करेंइस पर चिंतन करते थेबोले चिन्ना “ ड्रा करते हें“हाँ” आया तो विभाजन होगा“ना” होगा तो बिन्दुस्तानएक अखंडित वतन होगा.मेहरू राज़ी हो गएचिन...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Varsha Thakur
तमसो मा ज्योतिर्गमयः
77

माँ की दुआ नहीं मिलती

शायिर: वक़ील ख़ान 'बेदिल' (सम्भल)हर किसी को वफ़ा नहीं मिलतीदर्दे-दिल को दवा नहीं मिलतीकैसा इंसाफ़...[यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
विनय प्रजापति 'नज़र'
ग़ज़लों के खिलते गुलाब
110

पापाजी,मान जाइये

पापाजी....बचपन में कितनी ही बार इनकी गोद में खेली...वे मुझे कई नामों से बुलाते...गुडिया,नन्ही राजकुमारी...और भी जाने क्या-क्या...?...पापाजी मुझे भाइयों से ज्यादा प्यार करते....पहली बार उनके साथ ही स्कूल ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
65

رمضان مبارک

9 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
74

हमदर्द बनके आना अचानक मेरे क़रीब

शायिर: अमीर अशरफ़ ख़ाँ 'हसरत' (खतौली)सरमाया-ए-हयात1 मुझे कुछ मिला तो हैमहफूज़ मुफ़लिसी में भी मेरी...[यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
विनय प्रजापति 'नज़र'
ग़ज़लों के खिलते गुलाब
107

अंडाराम ......ANDARAAM...

अंडाराम , लोटपोटतथाअन्यपत्रिकाओमेंछपनेवालाकॉमिकचरित्रथा , इसकीजोड़ीडंडारामकेसाथथी। इसकेरचियेताश्रीविनोदभाटियाहै ...ANDARAAM IS THE COMIC CHARACTER FROM LOTPOT AND OTHER MAGAZINES . HE IS PAIRED WITH DANDARAAM . THIS CHARACTER IS CREATED BY SHRI VINOD BHATIYA ....  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
THE INDIAN COMICS भारतीय कॉमिक्स
98

मंगलू मदारी और बन्दर बिहारी...MANGLU MADAARI AND BANDAR BIHAARI...

मंगलूमदारीऔरबन्दरबिहारी ... एकलाजवाबकॉमिकसीरीज़थीजोमधुमुस्कानमेंछपतीथीइसकेचित्रकारथेमहानकार्टूनिस्टशेहाब ... MANGLU MADAARI AND BANDAR BIHAARI WERE THE FAMOUS COMIC SERIES FROM MADHUMUSKAAN ..THEY WERE CREATED BY CARTOONIST SHRI SHEHAAB JI. ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
THE INDIAN COMICS भारतीय कॉमिक्स
108

LIFE....जीवन .....

9 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
ART BY VIJAYKUMAR SAPPATTI
101

BUDDHA .... बुद्ध ...

9 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
ART BY VIJAYKUMAR SAPPATTI
107

WOMAN..... स्त्री......

9 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
ART BY VIJAYKUMAR SAPPATTI
117

KRISHNA.... कृष्ण ...

9 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
ART BY VIJAYKUMAR SAPPATTI
118

GHASITARAM.....घसीटाराम .....

घसीटाराम ,मेरेमनपसंदकॉमिकचरित्रमेंसेएकहै ... इसहमेशाहीहरचीजका२०सालकातजुर्बाहै , मैंनेइसपहलेदीवानामेंपढ़नाचालूकियाथा . फिरयेलोटपोटमेंऔरफिरडायमंडकॉमिक्समेंभीआनाशुरूहुआ । इनकीटीमक...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
THE INDIAN COMICS भारतीय कॉमिक्स
129


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