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कौए

कौएसुना हैविलुप्त हो रहें है।क्या सच ?पर क्या रमेसर की माँअब नहीं उड़ाएगीमुंडेर से कौए?पति के शहर सेलौटने की प्रत्याशा में।क्या अबझूठ बोलने परकाला कौआ नहीं काटेगाअबनहीं पढेंगे बच्चे'क' से कौ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
86
ART BY VIJAYKUMAR SAPPATTI
92
ART BY VIJAYKUMAR SAPPATTI
104

मल्हार : हिंदी कविता

मल्हार अचानककिसी बसंती सुबहतुम गरज बरसमुझे खींच लेते होअंगना में .मैं तुममेंनहा लेने को आतुरबाहें पसारेढलक जाती हूँ .मेरा रोम रोमतुम चूमते हो असंख्य बार .अपने आलिंगन मेंभिगो देते होमेरा पो...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
70

माँ ........प्यारी माँ.....

नमस्ते....सोच रहा था की ब्लॉग तो बना लिया ,लेकिन पोस्ट की संख्या तो एक पर ही टिकी हुई है।क्या लिखा जाए ...कैसे लिखा....जाए.....इसी क्रम में अपने मेल को देख रहा था। मेरे एक मित्र हैं ..अरूप ...जी ...जमशेदपुर ..स...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kanhaiya
ABHILASA
147

अपनी धरती ....अपना पर्यावरण ....

अब तक बहुत लिखा पढ़ा जा चुका है । पर्यावरण में फैले अलग अलग तरह के प्रदुषण के बारे में। समय आ गया है .....प्रदुषण को भगाने वाले उपायों को असली जामा पहानाने का,बारिश की बौछार के बीच हर जगह का मौसम खु...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kanhaiya
ABHILASA
129

रिक्शेवाले भइया

स्कूल दूर होने की वज़ह से हमें कई सालों तक रिक्शे की रोज़ सवारी का मौका मिला.इन ८-९ वर्षों में हमने कई रिक्शे बदले....इस वज़ह से हमें सारे रिक्शेवाले भइया का नाम तो याद नही है,लेकिन २ रिक्शावाले भ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
71

ABHILASA

नमस्कार बंधुवर ,ब्लॉग के बारे में सुनते,पढ़ते मन में उठी अभिलाषा.......ही आपके सामने अभिलाषा ब्लॉग के रूप में सामने है। आशा करता हूँ कि आपलोगों के साथ मेरी ये ब्लॉग यात्रा चलते रहेगी। आपके सुझाव ,...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kanhaiya
ABHILASA
156

यकीन

रेखा चित्र- प्रकाशगोविन्दयकीन [लघुकथा]वह दोनों आमने-सामने बैठे थे ! बीच में एक छोटी सी गोल मेज थी ! जिसमें कॉफी के दो प्याले, एक शुगर पाँट, दो चम्मच और एक ऐश ट्रे पड़ी थी ! आदमी सिगरेट पीते हुए थोड़...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
prakash govind
77

मायने बदल गए

परिवर्तन ही ‘स्थायी’ हैसमझता है आदमीतभी तो बदल लेता है,खुद को समय के साथअपना पूरा किरदारऔर बदल डालता है साथ मेंसोच, फितरत, स्वभाव सबकुछ।बदलावों के इस बवंडर में,फंस कर बदल जाते हैंलफ्जों के मा...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
79

तो इस लिए है सुअर घिनौना ।

स्वाइन फ्लू की खबर पढ़ते हुए मन ख्याल आया कि - - -तो इस लिए सुअर का मांस खाने को बुरा माना जाता है । पर अगले ही पल दूसरा सवाल उठा कि स्वाइन फ्लू की बीमारी तो हाल के वर्षों में ही सामने आई है, पर सुअर के ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
87

दिमाग की खिड़कियां खोलो अविनाश !

मोहल्ला से फिर एक ब्लागर को निकाल दिया गया । सलीम खान नाम के इस शख्स पर आरोप था अपने धर्म, इस्लाम का प्रचार करने का । यानि मोहल्ले में धर्म या मजहब की बात करना कुफ्र है, गुनाह है । इस एकतरफा कार्र...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
88

इस ‘सिरफुटव्वल’ का भी अपना ही मजा है

कल की मेरी पोस्ट ‘मुझे ‘चोर’ कहने का शुक्रिया ’ पर एक टिप्पणी आई है । टिप्पणी उन्हीं मित्र ‘समय’ की थी जिनकी टिप्पणी का जिक्र मैंने नाम लिए बिना किया । भले मानुष हैं, सो पुनः टिप्पणी भेजकर उन्ह...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
93

इस ‘सिरफुटव्वल’ का भी अपना ही मजा है

कल की मेरी पोस्ट ‘मुझे ‘चोर’ कहने का शुक्रिया ’ पर एक टिप्पणी आई है । टिप्पणी उन्हीं मित्र ‘समय’ की थी जिनकी टिप्पणी का जिक्र मैंने नाम लिए बिना किया । भले मानुष हैं, सो पुनः टिप्पणी भेजकर उन्ह...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
80

मुझे ‘चोर’ कहने का शुक्रिया

दो-चार दिन पहले की ही बात है । अपने ब्लाग पर आयी टिप्पणियां देख रहा था । चिरकुटों के चंगुल में हिन्दी शीर्षक से लिखी गई लेखमाला की तीसरी और अंतिम कड़ी पर आई दो टिप्पणियां कुछ ‘अलग’ सी दिखीं । अलग ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
81

ये कहीं और सुनने को न मिलेंगे।

कल अचानक बादलों को घिरते देखा। हालाँकि बारीश अभी दूर है लेकिन मैं जब भी पानी से भरे बादलों को देखता हूँ तो उस पिता की याद आती है जो अभी-अभी अपनी लाड़ली बेटी को विदा करके अपने सूने हो चुके घर के एक...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
78

दिल की बात

जब भी लिखना.....जी भर के लिखना.......... जुबान कीनहीं,बसदिल की बात लिखना।हमने देखाहै,दिल की बात,जब दिमाग से होकर,जुबान पर आती है,तोबात बिल्कुल बदल जाती हैयह अलग बात है,जमाने को वही बात पसंद आती हैTake Care Friends...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
70

माँ गुजर जाने के बाद

ब्याहता बिटिया के हक में फर्क पड़ता है बहुत छूटती मैके की सरहद माँ गुजर जाने के बाद अब नहीं आता संदेसा मान मनुहारों भराखत्म रिश्तों की लगावट माँ गुजर जाने के बादजो कभी था मेरा आँगन, घर मेरा, कमर...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
83
दुनिया
71

अविनाश का यह पाखंड !

परसों मोहल्ला से भेजा गया अविनाश का एक पोस्ट ब्लागवाणी पर देखा । ‘बेढंगे कपड़े पहनना, मुसीबत को बुलावा’ या ऐसे ही किसी शीर्षक से मोहल्ला पर पूर्व में प्रदर्शित एक पोस्ट के बारे में थी यह पोस्ट ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
83

मुझे अपनी बाहों मे भर लो

नदी के के इस पार शब्दों का मेला है कोई तुम्हे -पुकार रहा -माँ दीदी पत्नी दोस्त प्रेमिका इस भीड़ के लिए तुम देह के दर्पण का अलग -अलग हिस्सा हो किसी के लिए बिंदिया किसी के लिए राखी हो आँचल मे प्रसाद ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
79

मुझे अपने पास रख लो

अपनी हथेली की रेखाओं मेमेरा नाम लिख लोमुझे अपने पास रख लोअपनी आँखों के पिंजरे मेमुझेकैद कर लोअपने मन रूपी गमले मेमुझे गुलाब सा उगा लोअपने आँचल के छोर मेएक स्वर्ण सिक्के सा बाँध लोमुझे अपने प...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
64

ठीक कहा था डार्विन तुमने

ठीक कहा था डार्विन तुमने,सदियों पहले, ठीक कहा था ।विज्ञान की आड़ में छुप कर,समाज का गहरा-नंगा सच ।दुरुस्त थीं सौ फीसदी,अनुकूलन-प्राकृतिक चयन कीतुम्हारी दोनों ही अवधारणाएंऔर सटीक था एकदमयोग्यत...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
86

पूजा भी बनी प्रमोशनल इवेंट !

अखबार में छपी कुछ तस्वीरों ने बरबस ही आकर्षित किया । तस्वीरें थीं हालीवुड की सुपर माॅडल क्लाउडिया की । अरे गलत मत सोचिए भाई ! बिकिनी-स्वीमिंग कास्ट्यूम में देह उधाड़ू फोटो सेशन की नहीं थीं यह त...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
65

माफ करना।

देखकर हुस्नतेराग़र हो जाऊं शायर-दीवानातोमाफ करना।बंधके खिंचा चला आऊं तेरे सदके पे बार-बारतोमाफ करना।हो जाए ग़र इश्क तुझे हौले-हौले मुझसेतोमाफ करना।उड़ जाए नींद रातों की तेरी ग़र मुझसेतोम...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
71

ठीक कहा था डार्विन

ठीक कहा था डार्विन तुमने,सदियों पहले, ठीक कहा था ।विज्ञान की आड़ में छुप कर,समाज का गहरा-नंगा सच ।दुरुस्त थीं सौ फीसदी,अनुकूलन-प्राकृतिक चयन कीतुम्हारी दोनों ही अवधारणाएंऔर सटीक था एकदमयोग्यत...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
62

बहस को गलत दिशा में मत मोड़िये हुजूर

भई मसिजीवी जी ! बातों को गलत आलोक में न लें । न तो महिलाओं के लिए विधायिका में आरक्षण का मैं विरोध कर रहा हूं न ही यह कह रहा हूं कि विनय कटियार जो कह रहे हैं वही शब्दशः सही है और वही होना चाहिए । मैं...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
63

महिला बिल पर बेवजह नहीं है तकरार

महिला आरक्षण बिल पर रार और तकरार दोनों ही बढ़ती जा रही हैं । महिलाओं को समाज में, सियासत में, सत्ता में आगे लाने की बात हर दृष्टि, हर लिहाज से सही है । इसका विरोध न किया जाना चाहिए न हो रहा है । पर बि...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
75

जानवर से आदमी

जानवर से आदमीएक जानवरमेरे साथ रहता है.मेरे बगल मे सोता है.अपने बदन पर उगी हुई घासें दिखाकरमुझे उससे चिपकने को कहता है.उघरी हुई टाँगें दिखातापूरे घर मेंइधर उधर फिरता रहता है.सड़ी बदबूदार दांतो...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
69

सच्चा दोस्त

आज सुबह एक दोस्तों के ग्रुप को देखी.....हँसी-मजाक करते हुए,एक दुसरे की खिंचाई करते हुए....मुझे भी अपने स्कूल के वो दिन याद आ गए,जब हम सभी सहेलियों का ग्रुप इसी तरह की मस्ती करता था.हमारी क्लास डे शिफ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
68


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