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नई हलचल

दिनांक २४.०५.२०१० को आयोजित कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण

आदरणीय मित्रों,स्थानीय स्तर पर उत्पन्न अपरिहार्य व्यवधान के फलस्वरूप ब्लोगोत्सव-२०१० के सत्रहवें दिन का कार्यक्रम अचानक स्थगित करना पडा, जिससे आपको असुविधा हुई ! यह हमारे लिए अत्यंत खेद का ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
56

गाँधी जी की ताबीज:एक बहु-प्रचलित उद्धरण

गांधी जी की ताबीजगांधी जी कहते हैं, मैं तुम्‍हें एक ताबीज देता हूँ। जब भी दुविधा में हो या जब अपना स्‍वार्थ तुम पर हावी हो जाए, तो इसका प्रयोग करो। उस सबसे गरीब और दुर्बल व्‍यक्ति का चेहरा याद क...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
143

कभी हाँ कभी न तेरा ये बहाना बुरा लगता है ,,,,(प्रवीण पथिक,)

तेरा ये बनावटी सा मुस्कराना बुरा लगता है,,,कभी हाँ कभी न तेरा ये बहाना बुरा लगता है ,,,,कितनी तंगी खुशहाली साथ काटी थी हमने,,,,,ये जिन्दगी यूँ अधर में छोड़ जाना बुरा लगता है ,,,उम्र आंकते हुए खिची थी लक...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Praveen
इदम् राष्ट्राय || इदम् न मम् ||
113

ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत कार्यक्रम में अवरोध हेतु हमें खेद है

प्रिय मित्रों,ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत दिनांक २१.०५.२०१० को होने वाले कार्यक्रम अचानक नेटवर्क में हुई गडबडियों के कारण स्थगित करना पड़ रहा है , तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार सरबर में अचान...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
59

यहाँ तो चुग्गा भी मिलता है मजहब बताने पर,,,,(प्रवीण पथिक)

तंग हाली जब मुस्कराती है मेरे मुस्कराने पर,,,जाहिरात छुप नहीं पाते मेरे लाख छुपाने पर ,,,,,इन नर्म फूलो से कांटो के वायस मै क्या पूछू ,,,हर पाख जख्मी है बिखर जाता है सहलाने पर...इस जहां में इल्म ओ हुन...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Praveen
इदम् राष्ट्राय || इदम् न मम् ||
99

From Darkness to Light

O loss of sight, of thee I most complain!….Blind among enemies, O worse than chains, dungeon or beggary, or decrepit age! Light, the prime work of God, to me is extinct, and all her various objects of delight annulled, which might in part my grief have eased. Inferior to the vilest now become of man or worm; the vilest here excel me, they creep, yet see; I, dark in light, exposed to daily fraud...-John MiltonMilton was expressing a primal sentiment as ability to see is critical for realization...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
The Paradise
82

प्यार के रंग कितने महंगे होते है

होली  खेलने का  शोक  नहीं  था  रंग  कभी  ख़रीदे  ही  नहीं Drawing   के  रंग  तो मोम  के  थे 5 रूपये  के  12,या  पानी  वाले  लेलो  10 रूपये  के  6 कितने  सस्ते ...........प्यार  के  र...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
vinay
My Thoughts
30

रावण का अंतरद्वंद : गगन शर्मा

आकाश मे अपने पूरे तेज के साथ भगवान भास्कर के उदय होते ही आर्यावर्त के दक्षिण में स्थित सुवर्णमयी लंका अपने पूरे वैभव और सौंदर्य के साथ जगमगा उठी, जैसे दो सुवर्णपिंड एक साथ चमक उठे हों। एक आकाश ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
59

भारतीय रेल भगवन भरोसे

नईदिल्ली रेलवे स्टेशन पर आज दोपहर हुई घटना पर यदि गौर से सोचे तो आपको ये समझते हुए तनिक भी देर नहीं लगेगा की भारतीय रेल किस कदर यात्रियों के सुरक्षा के प्रति समर्पित है .आज जब टीवी चैनल पर खबर च...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Manish
ये सच है
92

हिंदी के अनुकूल होती जा रही है आईटी की दुनिया : बालेन्दु शर्मा दाधीच

 आज के कोई सात साल पहले भारतीय भाषाओं का एक महापोर्टल शुरू हुआ था, नाम था- नेटजाल.कॉम। वह हिंदी और अंग्रेजी सहित नौ भा षाओं में बनाया गया था और खबरों व लेखों के अलावा ईमेल जैसी सुविधाएं भी प्रद...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
65

हमें गर्व है हिंदी के इस प्रहरी पर

पिछले दिनों मैंने विदेशों में रहकर हिंदी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रमुख व्यक्तियों से आपका परिचय कराया . आज इस श्रृंखला के अंतर्गत हम आपका परिचय करवा रहे हैं अनिल ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
54

जगत में छ: श्रेणी के लोग होते है, द्वितिय श्रेणी उनकी है, अच्छा और बुरा दोनों देखना पर थोड़ा सा बुरा दिखाई दे तो उसे बहुत बड़ा चढ़ा देना।

प्रथम श्रेणी जो दूसरों में केवल दोष देखते हैं, पढ़ने के लिये चटका लगाईये।    बुरा भी देखना अच्छा भी देखना, लेकिन जो बुरा मिल गया तो बिल्कुल इस तरह झपट पड़ना कि अब मिल गया मिल गया। जो ढूँढ़ रहा थ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
विवेक रस्तोगी
हरे कृष्णा
126

इस कविता का एक-एक शब्द अनमोल है...!

 मैंने हमेशा एक फकीरी ज़िन्दगी जी है, 'क्यूँ' मेरे शब्दकोष में कभी नहीं रहा......यह 'क्यूँ' बस दूर करता है. अमृता मेरी जिंदगी  की एक खूबसूरत नज़्म ,--- जिसे मैंने जिया है, जाना है, लिखा है......पर वह अ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
53

समाज सेवा में युवा शक्ति

आज के समय में हमारी युवा शक्ति आगे बढ़ रही है। हमारी युवा शक्ति भारत में ही नहीं अपितु विदेशों में भी देश का नाम रोशन कर रही है। लेकिन समाज सेवा के रूप में हमारे युवा क्या योगदान दे सकते है , यह ए...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
ANKUR DWIVEDI
शुरुआत हिंदी लेखन से
156

आखिर क्यों मरती है केवल माएँ,,,(प्रवीण पथिक)

पिछले दिनों एक ऐसी घटना हुई जिसने हर व्यक्ति को छुआ ,, और समाज के बारे में सोचने वाले हर व्यक्ति ने अपनी अपनी तरह से अपने अपने विचार व्यक्त किये ,,,,अब क्या गलत है और क्या सही मै इस पचड़े में नहीं प...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Praveen
इदम् राष्ट्राय || इदम् न मम् ||
84

अवतार !

8 वर्ष पूर्व
Acharya Devesh  awasthi (Devesh Shastri)
10

Valmiki Tiger Reserve

Valmiki Tiger reserve, the 18th Tiger Reserve of the country and second in Bihar is located in the northern-most part of the West Champaran district of Bihar. The Extensive forest area of Valmikinagar was owned by the Bettiah Raj and Ramanagar Raj until early 1950s. Core area was declared as a National park in 1989. Government of Bihar had notified 464.60 sq. km. Area as Valmiki Wildlife Sanctuary in 1978. Later on, in 1990 an area of 419.18 sq. km. was added to the Sanctuary. Thus Valmiki Wildl...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
The Paradise
171

Bandipur Tiger Reserve

Bandipur Tiger Reserve, situated in Mysore District of Karnataka State, was among the first nine Tiger Reserves created in India at the launch of Project Tiger in 1973. The Bandipur National park is one of the most fascinating wild-life centres established in 1930’s by the Mysore Maharajas. It was their private hunting park. Late in 1941, it was expanded to adjoin the Rajiv Gandhi National Park- Nagarhole in the north-west, Kerala’s Wayanad Wildlife Sanctuary in the south-west and Tamil Nadu...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
The Paradise
83

हमें गर्व है हिंदी के इन प्रहरियों पर -2

विदेशों  में  बसे हिंदी सेवी की चर्चा के दौरान पिछले पोस्ट में आप सभी ने सुश्री पूर्णिमा वर्मन : संयुक्त अरब इमारात (यूएई) / श्री सुमन कुमार घई : कनाडा / श्री तेजेन्द्र श...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
54

दिमाग पर बढ़ता बोझ

वर्तमान समय में मनुष्य के दिमाग पर लगातार कार्य का बोझ बढ़ता ही जा रहा है । एक समय में एक व्यक्ति का दिमाग हर तरफ कार्य कर रहा है । उदाहरण के लिए - एक साधारण व्यक्ति एक ही समय में गाने सुनने के साथ ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
ANKUR DWIVEDI
शुरुआत हिंदी लेखन से
82

क्‍या इतना नेक होना संभव है ?

श्रमिक दिवस पर विशेष प्रस्तुति : क्‍या इतना नेक होना संभव है ?आज मजदूर दिवस है और इस दिवस डा0 कविता किरण  मजदूरों  की पीड़ा को रेखांकित करती एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रही हैं ...! "अबके तनख्वा दे दो ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
47

हमें गर्व है हिंदी के इन प्रहरियों पर -1

विदेशों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार से जुड़े हिन्दी-प्रेमी() सुश्री पूर्णिमा वर्मन : संयुक्त अरब इमारात (यूएई)संपादक : विश्वजाल पत्रिका अभिव्यक्ति एवं अनुभूति            () श्री सुमन कुमार ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
58

बताता नहीं हु अपना दर्द किसी को

मैं पियूं भी पानी तो लोग रम समझते हैं ... दुसरो के लिए दुखी होता हु तो लोग उसको मेरा गम समझते हैआँखों में मेरी गिरा है कोई तिनका शायद और लोग है की मेरी आँखे नम समझते है....बताता नहीं हु अपना दर्द किसी...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
vinay
My Thoughts
30

उत्तम स्वास्थ का आधार "प्राणायाम"

स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन निवास करता है! यदि शरीर रोग ग्रस्त है तो सुख शान्ति और आनन्द वैभव आदि कहां ? भले ही धन सम्पदा, कीर्ति सब कुछ प्राप्त है पर यदि तन स्वस्थ नही है तो यह मानव शरीर बोझ सा ही प...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
janki oli
Sunder Sapna
76

युनिकोड एक ऐसी कोडिंग प्रणाली, जिसमें विश्व की सभी जीवंत भाषाएँ समाहित हैं

कुछ ही दिन पूर्व एक विद्वान् लेखक का शोधपूर्ण तकनीकी लेख पढ़ा. “बहुत कठिन है डगर पनघट की”. इस लेख में पाँच तकनीकी बाधाओं का उल्लेख करते हुए यह सिद्ध करने का प्रयास किया गया था कि इन समस्याओं का ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
48

अहो अभावता तुझको ... कैसे मै अभिनन्दन दूँ ,,,,(, प्रवीण पथिक,

अहो अभावता तुझको ... कैसे मै अभिनन्दन दूँ ,,,,तू मेरे पहलुओ का उच्चारण ,,,,तुझको कैसे मै वंदन दूँ ,,,,,,जग दुनिया जंगम क्या है ,,,,ये तेरे चितावन से चेता मै ,,,कनक भवन या श्रमिक कुटीर ,,ये तेरे दिखावन से चेता ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Praveen
इदम् राष्ट्राय || इदम् न मम् ||
88


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