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नई हलचल

बुद्धिजीवी होना भी एक चस्का : डा० अरविन्द मिश्र

आज डा अरविन्द मिश्र का यह आलेख राष्ट्रीय सहारा के दिनान्क२६.०४.२०१० को प्रकाशित हुआ है ...सूचनार्थ यहाँ प्रस्तुत है-  पुन: परिकल्पना पर वापस जाएँ ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
47
Vivek Vaishnav
82

हृषिकेश सुलभ को इंदु शर्मा कथा सम्मान

वर्ष 2010 के लिए अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान कहानीकार और नाटककार-रंगचि‍न्‍तक हृषीकेश सुलभ को राजकमल प्रकाशन से 2009 में प्रकाशित उनके कहानी संग्रह वसंत के हत्यारे पर देने का निर्णय लिय...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
AMRIT UPADHYAY
कशमकश
59

जगत में छ: श्रेणी के लोग होते हैं, प्रथम श्रेणी उनकी है, अर्थात सबसे निकृष्ट कहा जा सकता है, कि वह जो दूसरों के केवल दोष ही देखें।

श्रीमद्भागवतम स्कन्ध ४ श्लोक १२दोषान परेशान हि गुणेषु साधवो गृहन्नति केचित न भवाद्रिशु द्विजगुणांस च फ़लगुन बहुलि परिष्णवो महत्तमास तेषु अविदत्त भवान अगम ।दोषान – दोष, परेशां – दूसरों के, ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
विवेक रस्तोगी
हरे कृष्णा
145

मैं हिंदी हूँ !

मैं हिंदी हूँ !विश्व के लगभग १३७ देशों में हमारे अनुयायी बसते हैं, वे मुझसे वेहद  प्रेम करते  हैं। १९९८ के पूर्व मातृभाषियों की संख्या की दृष्टि से विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाष...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
59

जीवन है संग्राम यहाँ , तुम रण की भाषा बोलो ,,,,,(प्रवीण पथिक)

उठ चलो पथिक तुम आभासी चोला छोडो ,,,जीवन है संग्राम यहाँ , तुम रण की भाषा बोलो ,,,,,उठ चलो पथिक चिंगारी को ,तुम आग बना दो ,,,,निर्बल को सम्बल देके , सोये भाग्य जगा दो ,,,,उठ चलो पथिक ,, मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Praveen
इदम् राष्ट्राय || इदम् न मम् ||
83

हमें गर्व है हिंदी के इस प्रहरी पर

उगते सूरज के देश जापान से हिंदी प्रेम का पैग़ाम देने वाला कोई भारतीय नहीं, जापानी मूल के मिज़ोकामी हैं, जो ओसाका विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर हैं ....वे पिछले 36 साल से हिंदी क...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
57

उत्तरपुस्तिकाए दिखाना

मुझे आज तक समझा मे नहीं आया की भारतीय शिक्षा संस्थाओ और लोक सेवा आयोगों को परिक्षर्तियो को उनकी कापी की नक़ल देने मे क्या दिक्कत हें । कुछ पेसे लेकर नकल या ज़ेरोक्स देने से तो brshtaachar ही रुकेगा । एस...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
rakesh jain
आउट आफ़ बाक्स
81

शादी-प्यार

एक बार कही अचा सा कोटेशन पढ़ा था--प्यार मे आदमी गुलाम हो जाता हें और शादी मे गुलाम बनाने की कोशिश करता हें ....  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
rakesh jain
आउट आफ़ बाक्स
85
Vivek Vaishnav
76

हिन्दी हैं हम ......हिन्दी हमारी शान है !

!!  हिन्दी के बारे में विभिन्न महापुरुषों के वचन !!हिंदी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्रनिर्माण का प्रश्न है - बाबूराम सक्सेना।हिंदी का पौधा दक्षिणवालों ने त्याग से सींचा है - शंकरराव कप्पी...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
95

चेलाराम, मैं और ज़हीर भाई ...यानी की खूब जमेंगी जब मिल बैठेंगे दीवाने तीन........

जी हाँ दोस्तों , मैं सुना रहा हूँ कहानी तीन दोस्तों की ....ये तीन दोस्त है चेलाराम - मेरा मनपसंद कॉमिक चरित्र दीवाना कॉमिक बुक से ......और ज़हीर भाई , जो की कॉमिक्स की दुनिया में जाना पहचाना नाम है ....और व...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
THE INDIAN COMICS भारतीय कॉमिक्स
128

बुरी नज़र वाले , तू पाकिस्तान चला जा ..

नेशनल हाईवे नं १० से जाते हुए इस ट्रक ने अचानक ही हमारा ध्यान खींच लिया, और मैं अपने मोबाईल से इसकी तस्वीर निकाले बिना नहीं रह सका, अक्सर हाईवे पर ट्रकों के पीछे शेर-ओ- शायरी,जुमले इत्यादि लिखे द...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Prashant Gupta
'क्रांति'
89

एक लड़ाई अपनों से ...

लन्दन निवासी प्रवासी भारतीय शिराज़ अन्दानी, गुजरात उच्च न्यायालय के तरफ से आये फैसले से बहुत हर्षित हैं, शिराज़ अन्दानी के खिलाफ स्थानीय पुलिस में उनको प्रताड़ित करने हेतु विभिन्न अपराधिक ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Prashant Gupta
'क्रांति'
85

जुदाई

मिलन की चाह मेँजुदाई काअपना है मजाये बात और हैसब माने इसे एक सजामिलन के नशे से भीबड़ा है नशा जुदाई काइसके उतरने कीअदा कानहीँ है कोई पताखोया खोया रहता हैजब मनकिसी की जुदाई मेँहर चेहरे पेवही चेह...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Deepa Joshi
अल्प विराम
1

दिल टूटने का दर्द

वो क्या जाने  दिल टूटने का दर्दजो प्यार करके देखा करते है......................!ये दर्द तो उनसे पूछोजो टूट जाया करते है दिल टूटने के बाद ............................................  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
vinay
My Thoughts
30

आइए, छलें खुद को

मोह जब हो भंग, तो आदमी खुद को ठगा सा महसूस करता है। उसे लगता है कि वह अब तक खुद को छल रहा था। वैसे खुद को छलने वाले लोग भी होते हैं, आत्ममुग्ध, आत्मरति के शिकार। पर जब वाकई दूसरों के हाथों छले जाएं, त...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
अनुराग अन्वेषी
74

क्या अकबर पढ़ा-लिखा नहीं था ?

छोटी आयु में राज्य की जिम्मेदारियां सँभालने के कारण अकबर पढाई नहीं कर पाया था । आश्चर्यजनक तथ्य यह है की उसे न तो लिखना आता था और ना ही पढना आता था । पढना-लिखना ना आने के बावजूद भी वह परिस्थितिय...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
ANKUR DWIVEDI
शुरुआत हिंदी लेखन से
138

स्पोर्ट्स-डे की वो मार्चपास्ट

अपनी जीवन यात्रा लिखते-लिखते अचानक अतीत से वर्तमान में चली आई थी.....इससे बीच के कुछ वर्ष पीछे छूट गए...अब वो बार-बार मुझसे अपना स्थान मांग रहे हैं...कहते हैं,"हमारे बिना तुम्हारी जीवन-यात्रा कैसे प...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
59

मनीष की कलम से आपकी खिदमत मे.......

१.कसम खुदा की शायरी का मिजाज़ हीं कुछ और होता यक़ीनन शायरों की तादाद भी कुछ और होता ,हर हुस्न दीदार करती शायरों की शायरी सेकाश के कमबख्त ये आइना ना होता ।२.कौन कमबख्त हदे आशिकी को बर्दाश्त कर...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Manish
ये सच है
102

मैं कौन हूँ , एक लाचारी सी ..

मैं कौन हूँ , एक लाचारी सी .. मैं कौन हूँ, अबला नारी सी..मैं कौन हूँ , जिसने जन्म दिया तुम सबको को अपने आँचल में..मैं कौन हूँ, जिसने सींचा है तुमको हरपल में I मैं कौन हो जिसको नहीं पता, बच्चे उसके गोरे ह...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Prashant Gupta
'क्रांति'
132

वो छोटी छोटी बातों पर...

वो छोटी छोटी बातों पर , झट से लड़ जाना याद है क्या..वो लम्बी लम्बी मांगो को, रो कर मनवाना याद है क्या..वो उड़ाना ऊंची पतंगों को, फिर भागना मीलों पकड़ने को..वो मेरे सारे कंचों को , लेकर गुम जाना याद है ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Prashant Gupta
'क्रांति'
82

जीवन में यूँ ही कभी-कभी..

जीवन मैं यूँही कभी कभी , कुछ ऐसे पल भी आते हैं,होकर विचलित हम सपनो में, बैठे बैठे खो जाते हैं...मन निष्चल सा निर्जीवन सा , क्षीण क्षीण हो जाता है. कुछ उजली-धुंधली यादों मैं , न जाने क्यूँ खो जाता है..क...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Prashant Gupta
'क्रांति'
96

मनीष की कलम से आपके खिदमत मे ....

१.वक़्त की बेवफाई देखो कितने सितम ढाए हैंकभी नफरत थी जिस गली से हमे आज वहीँ घर बनाये हैं हमने ।२.हमे सराबी कह कर क्या खूब इलज़ाम लगायाहै तुमने , जरा पैमाने से पूछो हमे ऐसा बनाया हैकिसने ।३....  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Manish
ये सच है
102

“ढाई आखर प्रेम का”

एक प्रेमीप्रेमिका सेकरने आया था मुलाकात“वेलेन्टाइन डे” की थी वो रातप्रेमी ने प्रेमिका को थाकुछ ऐसे पकड़ामानो नन्हे शिशु कोमाँ ने हो बांहों में जकड़ा बिन बोलेआंखोँ में आंखें डालवो कर रहे थेसा...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Deepa Joshi
अल्प विराम
1

म्रत्यु तो नव जीवन का प्रसार

वेद और वेदांत का भाष ...राग में वैराग का आभास ,तुम्ही दे सकते होव्यथित मन थकित तन को ,चिर विकाश कर थकानतुमही हर सकते होक्या शुभ क्या अशुभ ,तुम कण वासता हो ।फिर क्यों दिग्भर्मित मैं ??उखाड दो न इस दा...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Praveen
इदम् राष्ट्राय || इदम् न मम् ||
93

मनीष क़ी कलम से आपके खिदमत मे ....

१.हैतकलीफकिवोखुदहींबँटचूकाहैचंदनमोमेकहींअल्लाहतोकहींइश्वरकेचाहनेवालोमे।वोकहताहैहमतोएकहैएकहींधरतीबनाईतुमहींतोजिसनेलकीरखिंचइसपरसरहदेंबनाई।२.हमेखुदपेनहींखुदापेतरसआताहैहसीन...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Manish
ये सच है
113
Vivek Vaishnav
94


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