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नई हलचल

चूल्हा-चौका फाइल बच्चे दिन भर उलझी रहती है

ए. एफ़. नज़र, सवाई माधोपुरचूल्हा-चौका फाइल बच्चे दिन भर उलझी रहती हैवह घर में और दफ़तर में अब...[यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
विनय प्रजापति 'नज़र'
ग़ज़लों के खिलते गुलाब
100

GANIGA TELI VAISHYA , गनिगा तेली वैश्य

Ganiga or Gandla is not caste it is kulakasubu(profession)of some people of India.And it has nothing subcaste, community like shivajyothi,nagarajyothi,lingayutha,somakshathriya,etc doing in this profession for money. If another communities like okkaliga,lambani,bramhana would did this profession then people would have called them as okkaliga ganiga,lambani ganiga,bramhana ganiga.person drives gana(oil press) is a ganiga(oil monger) who form any community.Social and Government mentioned ganiga as...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Praveen Gupta
हमारा वैश्य समाज - HAMARA VAISHYA SAMAJ
991

शायद अब हम कुछ भी नहीं बचा सकते.....!!??

शायद अब हम कुछ भी नहीं बचा सकते.....!!??               बहुत अजीब हालत है मेरे मन की !!बहुत कुछ लिखना चाहता हूँ, कहना चाहता हूँ,गाना चाहता हूँ,मंचित करना  चाहता हूँ....पल-दर-पल आँखों के सम्मुख ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
हम हिंदी चिट्ठाकार हैं
111

हर बार की तरह वो बात नहीं.....................

 हर  बार  की  तरह  इस  बार  वो  रात  नहीं हर  एक  चीज  है  वही  पर  वो  बात  नहीं कभी  सुना  था  जो  वो  गुजर  रहा  हे  मेरे  सामने मगर  उसे  रोकपाऊं  वो&...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Anupam
मेरी कविताएँ...........................
33

भाई आमिर.....इन बुलंद हौसलों को सलाम....!!

         भाई आमिर.....इन बुलंद हौसलों को सलाम....!!       एक बार फिर आमिर मैं तुम्हारे प्रोग्राम को देखते हुए कई बार भीतर ही भीतर रोता रहा,ये आंसू किन्हीं लोगों के जज्बे के,ईमानदारी के,हिम...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
हम हिंदी चिट्ठाकार हैं
113

कहानी मुसाफिर कि....

कहानी मुसाफिर किमुसाफिर बनकर इस दुनिया मे आते हैं,तो क्यूँ किसी से दिल लगाते हैं,किसी अजनबी को अपना बनाते हैं,अकेले ही आते हैं इस दुनिया मे ,इस दुनिया से अकेले ही जाते हैं,तो फिर साथ जीने मरने क...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
vijay kumar
मैं और उनकी तन्हाई
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“नन्हे सुमन” की भूमिका" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

आज 29 जुलाई कोउड़नतश्तरी वाले समीर लाल जी का जन्म दिन है।इस अवसर पर मैं उनकोहार्दिक शुभकामनाएँ और बधाइयाँ प्रेषित करता हूँ!लगभग 2 वर्ष पूर्व उन्होंने मेरी बालकृति“नन्हे सुमन” की भूमिका लिख...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
117

“नन्हे सुमन” की भूमिका (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आज 29 जुलाई कोउड़नतश्तरी वाले समीर लाल जी का जन्म दिन है।इस अवसर पर मैं उनको हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाइयाँ प्रेषित करता हूँ!लगभग 2 वर्ष पूर्व उन्होंने मेरी बालकृति“नन्हे सुमन” की भूमिका ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
83

बदलती परिस्थितियाँ और रक्षाबन्धन

कहा जाता है किसी देश की संस्कृति उसका हृदय व मस्तिष्क दोनों ही होती हैं।  जनमानस प्रसन्नता और खुश होकर आनंदपूर्वक जीवन यापन कर सके, यही तो जीवन का लक्ष्य है । इसका उत्तरदायित्व उस देश क...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Kavita Rawat
KAVITA RAWAT
165

आज मैंने खुद से सवाल पूछा ...............

आज मैंने खुद से सवाल पूछा क्या स्वयं की  बर्बादी  का, जिम्मेदार  होगा  दूजा   दिल से मेरे आवाज आई सायद अभी हालात  का, कारन नहीं खोजा.हर बात पर ओरों पर, ऊँगली उठाते हैंकभी खुद अपनी गली ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Anupam
मेरी कविताएँ...........................
34

About Dharamsala and Tourist Attractions

About Dharamsala:                                                                                                                                         &...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Manu
Kangra Valley
184

"उज्जवला की बातें करें" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मा.पं. नारायणदत्त तिवारी जी को मैं अपना राजनीतिक गुरू मानता हूँ। सभी लोग जानते हैं कि उन्होने देश की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान किया।      इसके बाद उन्होंने आजाद भारत की सियासत में ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
131

खबरगंगा: 'डायन' : औरतों को प्रताड़ित किये जाने का एक और तरीका

वे बचपन के दिन थे ....मोहल्ले में दो बच्चों की मौत होने के बाद  काना-फूसी शुरू हो गयी और एक बूढी विधवा को 'डायन' करार दिया गया...हम उन्हें प्यार से 'दादी' कहा करते थे...लोगो की ये बाते हम बच्चों तक भ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
ATUL WAGHMARE
0

खबरगंगा: 'डायन' : औरतों को प्रताड़ित किये जाने का एक और तरीका

वे बचपन के दिन थे ....मोहल्ले में दो बच्चों की मौत होने के बाद  काना-फूसी शुरू हो गयी और एक बूढी विधवा को 'डायन' करार दिया गया...हम उन्हें प्यार से 'दादी' कहा करते थे...लोगो की ये बाते हम बच्चों तक भ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Manoj Pandey
प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ
74

हृदय भी मेरा हाथ है

इस पन आकर मुझेइलहाम हुआ किहृदय भी एक हाथ था मेराअरसे से मेरी पीठ से बँधा फ़िजूल बंधनों से नधा हृदय हां, अब भीएक हाथ है मेरामुझ आँख के अंधे की      लाठीइस अंधेर दुनिया के भटकन में और देखो, व...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
सुशील कुमार
स्पर्श | Expressions
82

मैं एक बेरोजगार हूँ ...................

मैं इसी देश में  बसने बाला, सच्चाई से जीने बालामगर अब भार हूँ ,क्योंकि मैं एक बेरोजगार हूँ,मैं एक बेरोजगार हूँ बचपन मेरा बीत गया लोगों से सुनते सुनतेमैं देश का आधार हूँ ,मगर आज मै नाकारहूँक्...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Anupam
मेरी कविताएँ...........................
65

قبرستانوں پر ناجائز قبضے‎

فردوس خان لوگوں نے اپنی زمین جائداد وقف کرتے وقت یہی تصور کیا ہوگا کہ آنے والی نسلوں کو اس سے فائدہ پہنچے گا۔ بے گھروں کو گھر ملے گا اور ضرورتمندوں کو مدد ملے گی۔ لیکن ان کی روحوں کو یہ دیکھ کر کتنی تکلیف پہنچتی ہوگی کہ ان کی وقف کی گئی زمین جائداد چند سکوں کے عوض ضرورتمندوں او...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
97

मैं

कोई मुझे मसखरा कहता है,कोई खुशमिजाज़ कहता है,कोई घमंडी तो कोईनिष्ठूर कहता है |अलग हूँ मैं सबकी निगाहों में,किसी की आँखों का कांटा भी हूँ ,किसी की राह का पत्थर भी हूँ ,बन हर किसी की जिंदगी का हिस्स...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
अखिलेश रावल
"मेरे भाव मेरी कविता"
91

मोहपाश को छोड़ सही रास्ता दिखाएँ .

मोहपाश को छोड़ सही रास्ता दिखाएँ .  जुबैर अहमद अपने ब्लॉग ''बी.बी.सी ''में लिखते हैं कि राजेश  खन्ना जी को शायद तनहाइयाँ  मर गयी .तन्हाई शायद यही तन्हाई उनकी जिंदगी में अनीता आड...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
SHALINI KAUSHIK
कानूनी ज्ञान
50

ऐ देश मेरे.............

मैंतेराएहसानकैसेचुकाऊ, मिलातुझसेहैक्या  कैसेबताऊऐदेशमेरेसौबार, जानतेरेदरपरलुटाऊं तमन्नाइतनीहैमरनेसेपहलेतेरेमैंकामआजाऊँतुझे छोड़करजानेकाख्यालन  एकपललाऊं तेरीमाटीकीखुस...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Anupam
मेरी कविताएँ...........................
37

प्रणव देश के १४ वें राष्ट्रपति :कृपया सही आकलन करें

प्रणव देश के १४ वें राष्ट्रपति :कृपया सही आकलन करें २६ जनवरी १९५० भारत में संविधान द्वारा गणतंत्र लागू किया गया और मई १९५२ में हुए प्रथम राष्ट्रपति के चुनाव में डॉ.राजेंद्र प्रसाद व...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
ATUL WAGHMARE
0

प्रणव देश के १४ वें राष्ट्रपति :कृपया सही आकलन करें

प्रणव देश के १४ वें राष्ट्रपति :कृपया सही आकलन करें २६ जनवरी १९५० भारत में संविधान द्वारा गणतंत्र लागू किया गया और मई १९५२ में हुए प्रथम राष्ट्रपति के चुनाव में डॉ.राजेंद्र प्रसाद व...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Manoj Pandey
प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ
73

No Title

दिल में एक दर्द-सा अक्सर उभरता क्यों हैजो तुझे भूल गया याद तू उसे करता क्यों हैमुझे मालूम है उससे नहीं अब रिश्ता कोईहवा में चेहरा फिर उसका यूँ तिरता क्यों है                     *******ये ब...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Sarika Mukesh
अंतर्मन की लहरें Antarman Ki Lehren
57

ये सौभाग्य-दुर्भाग्य क्या है......?(कुँवर जी)

सौभाग्यसिकुड़ता सालगा तोफैली माथे की सलवटें,अबये सौभाग्य-दुर्भाग्य क्या है...?सब भाग्य है बस.....जय हिन्द,जय श्रीराम,कुँवर जी,...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
hardeep rana
kunwarji's
87

paani............

कभी दीवारों की सीलन में कभी छत की मुंडेरों पर जमा होता है पानीमौसम की अंगड़ाई से निकला वो खिड्किओं पर थमा पानीबारिश के झोंकों के साथ लाता  पुरानी  वीरानीहवा   के साथ बहता  नदिओं सा  या ज...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Anupam
मेरी कविताएँ...........................
31

विहान के जन्मदिन पर

       विहान के प्रथम जन्म दिन पर नाना और नानी का                            ढेरों प्यार और आशीर्वाद                                          दिवस आज को विहान त...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Kailash Sharma
बच्चों का कोना
134

“बोल बम”

शिवगादी गुफा, यानि 'गजेश्वरधाम' का तोरणद्वार       बरहरवा से राजमहल कोई 30 किलोमीटर दूर है। सावन के किसी एक सोमवार को हम वहाँ से गंगाजल लाकर बरहरवा के विन्दुवासिनी पहाड़ पर शिवलिंग पर जल चढ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
जयदीप शेखर
कभी-कभार
302

गीतांजलि : रविन्द्रनाथ टैगोर

गीतांजलि : रविन्द्रनाथ टैगोर मित्रो , हममें से शायद ही कोई होंगा , जिसने इस कृति को नहीं पढ़ा है . और अगर नहीं पढ़ा है तो मेरा निवेदन है कि जरुर ही पढ़ ले . इसलिए नहीं कि इसे सब महान कृति मानते है . ये है ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
THE INNER JOURNEY ::: अंतर्यात्रा
84

Story : Dare to dream

“Is the price of living a dream much higher than the price of living without daring to dream?” asked the disciple.The master took him to a clothes store. There, he asked him to try on a suit in exactly his size. The disciple obeyed, and was very amazed at the quality of the clothes.Then the master asked him to try on the same suit – but this time a size much bigger than his own. The disciple did as he was asked.“This one is no use. It’s too big.”“How much are these suits?” the ma...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
HRUDAYAM :: ह्रदयम
56

यह तजरिबा हुआ है दुनिया में हमको आकर

शायिर: आफ़ताब अजमेरी यह तजरिबा हुआ है दुनिया में हमको आकर काँटों से दिल लगाओ फूलों से ज़ख़्म खाकर...[यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
विनय प्रजापति 'नज़र'
ग़ज़लों के खिलते गुलाब
113


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