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नई हलचल

प्राचीन भारत मे धातु विज्ञानं की उन्नत परंपरा

आपको बताना चाहूँगा क़ि आज जो दुनिया के वैज्ञानिक बेस्ट क्वालिटी  क़ि जो स्टील बना रहे है उसमे भी ये गुण नहीं है क़ि वह जंग रहित हो| परन्तु भारत में दशवीं शताब्दी में जन्गरहित स्टील बनता था और...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Sanu Shukla
राष्ट्र सर्वोपरि
94

तुम्हारी याद के बादल

अरे देखो तोइन पर्वतों के कन्धों पर लदे है येशरारती बच्चों क़ि तरहशरारत करते हुए खेलते उमड़ते घुमड़ते बादल|ठीक वैसे ही जैसे क़ि मेरे  दिमाग पर मेरी याददाश्त पर लदे हों बरस जाने को एक दम आतुर...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Sanu Shukla
राष्ट्र सर्वोपरि
83

एक और एक बराबर दो रोटियां

वहां एक क्लास मेंएक अध्यापक महोदय पूछ रहे थे प्रश्न पढाये हुए पाठ में सेअपने क्लास में उपस्थित छात्रों सेइसी क्रम में उन अध्यापक महोदय ने सामने बैठे एक छात्र से पूछा क़ि बताओ बेटा एक और एक होत...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Sanu Shukla
राष्ट्र सर्वोपरि
82

1 जुलाई--वो बारिश , वो स्कूल .... मेरे मन कि एक उन्मुक्त उड़ान

१ जुलाईयाद है कितनी तारीख है आज, १ जुलाई ....फिर वही 1 जुलाई..उमंग भर उठी मन में ..और ली फिर इसने भूत की ओर अंगडाई...(मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है उसका मन और शायद सबसे बड़ी कमजोरी भी....पर बड़ा उन्मुक्त रह...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
abhinav pandey
22

कुछ हाइकु कविताये

(१) पानी बरसामहक उठी मिटटीहरी हुयी धरा |(२) शौर्य  पर्यायपूछ लिया बच्चे सेबोला भारत|(३) कल फिर सेमर गया है भूखाकहाँ है दानी?(४) सूर्य निकलाफिर कमल खिलेधरा बौरायी|(५) हुआ अँधेराधरा पे छाये व्योमया...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Sanu Shukla
राष्ट्र सर्वोपरि
80

क्या आप भगवान में विश्वास करते हैं.????

यह तब की बात है जब मैं 5 साल का था . मैं खेल के मैदान में खेल रहा था ...... "छिपन - छिपाई " ..... कॉलोनी के बच्चों के एक बड़े झुंड के साथ.... एक नयी छिपाने की जगह की तलाश में ..... मैं एक लोहे की कीलों एवं कांच भरी ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
abhinav pandey
23

ऐ मेरे क्रोध

ऐ मेरे क्रोधतुम कब आयेऔर आकर  चले भी गएपर छोड़ गए पीछे निशानअपने आने के,पर अरे भले आदमीकम से कम एक पाती ही भेज देतेअरे छोडो ये आधुनिक जमाना हैकम से कम एक एस.एम्. एस. ही कर देतेजिससे  अपने आने की&nb...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Sanu Shukla
राष्ट्र सर्वोपरि
77
बुन्देली साहित्य कला आकादमी
91

अपनी सकारात्मक सहभागिता का विश्वास दिलाता हूँ : सुमन सिन्हा

जैसा कि आप सभी को विदित है कि आगामी कुछ महीनों बाद लखनऊ में अन्तराष्ट्रीय हिंदी ब्लॉग उत्सव मनाने की तैयारी चल रही है और इसके क्रियान्वयन की दिशा में ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम पूरीतरह कटिबद्ध ह...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
106

मेरी पहली पंजाबी रचना!

कृपया तस्वीर पर क्लिक करें!दोस्तों,आज मैंने अपनी पहली पंजाबी रचना लिखी है! मेरे एक मित्र हैं हरप्रीत सिंह जो दुबई में रहते हैं उन्होंने मुझ से कहा एक दिन की आप क्यों पंजाबी में नहीं लिखते! तो मै...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
surender
"ख़्वाबों का तसव्वुफ़"
90

कुछ बातें

बचपन से ही जब मुझे घर पर छोड़ कर दोनों भाई स्कूल जाया करते थे....मुझे बहुत बुरा लगता था और मैं बस इंतज़ार किया करती थी....न सिर्फ उनके आने का बल्कि जल्दी से बड़ी होकर अपने स्कूल जाने का भी....और जब वो दिन ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
63

इस भारत भूमि पर पुनः पधारो

दूर तक फैला घना कुहासा है,देता कुछ नहीं दिखाई है,फिर आज तेरे बच्चों ने ही,ऐ भारत माँ तेरी हंसी उड़ाई है,संस्कृतियाँ हो रही शून्य है,पश्चिमी झंझावातों में पड़कर,जो चले आ रहे मानव मूल्य सदियों से,...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Sanu Shukla
राष्ट्र सर्वोपरि
84

छवि

आज ऐसे ही एक ख़याल आया|दिल किया की उसे लफ्ज़ दे दूं| इस असंखयों की भीड़ में अगर दूर से देखे तो सभी एक भीड़ का हिस्सा है| पर करीब जाकर देखे तो हर एक की अलग कहानी अलग किस्सा है| उसका अपना अलग वजूद है|उस...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
अखिलेश रावल
कुछ विचार
119

कुछ कहें या चुप रहे दिन कुछ ऐसा होता है ख्वाब हकीकत ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
नवोत्पल
50

कुछ मेरे बारे में...

किसी ने कहा है कि, "अगर आपमें लिखने की कला है, मगर इतनी नहीं कि उपन्यास लिख सकें.. और जिरह करने की क्षमता है लेकिन इतनी नहीं कि वकील बन सकें..तो आप 'पत्रकार' ज़रूर बन सकते हैं.." शायद इसी कारण से मैं भी '...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Prashant Gupta
'क्रांति'
101

कदम दर कदम

visit.. http://www.mahaktepal.comहरबारउठतीहूँसंभालतीहूखुदकोआगेबदनेकोफिरकदमबढातीहूँ ,कदमआगेपड़तेहीअपनेहीआतेहैपैरअडातेहैजमीपेगिराकेमुझेतमाशादेखनेवालीभीड़मेजाकरखुदभीशामिलहोजातेहै .मगरफिरभीमैंकोशिश...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
sakhi
sakhi with feelings
98

लहरों से लौटकर...

टकरा गए ख्वाब इस बार,समंदर की लहरों से सीधे सीना तान कर, चकनाचूर भी हो गए,ना वक्त बचा पाया इन ख्वाबों को ना परोस पाया कभी मन के आईने में, बस कुछ धुंधलकों में दम घुट गया लहरों में,टूटकर गिरते ख्वाब ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
AMRIT UPADHYAY
कशमकश
103

पशु

ओ मनुष्य / नमन करो पशु को विशेषकर / वंदना करो बंदर की अपने पूर्वजों को / कर पहला नमस्कार हर पशु/ तेरा गुरु कुछ सीखा / सीखकर आचरण कर तदनुसार पशु हम से हैं कहीं अधिक स्वाभिमानी हाथी के पाँव पड़ा हो कोई ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
नवोत्पल
78

पशु

ओ मनुष्य / नमन करो पशु को विशेषकर / वंदना करो बंदर की अपने पूर्वजों को / कर पहला नमस्कार हर पशु/ तेरा गुरु कुछ सीखा / सीखकर आचरण कर तदनुसार पशु हम से हैं कहीं अधिक स्वाभिमानी हाथी के पाँव पड़ा हो कोई ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
नवोत्पल
60
29

सावन के झूलों की तरह!

जब तुम दूर गए तो पतझड़ था,बस तेज़ हवा और अंधड़ था,अब लौट बसंत फिर आया है,तुम भी आओ फूलों की तरह,डालों पे जो हैं सूने पड़े,तेरी बाहों को छूने खड़े,आ के बाहों में तुम ले लो,उन सावन के झूलों की तरह,इंतज़ार ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
surender
"ख़्वाबों का तसव्वुफ़"
111

कविता की खोज में ........

जिस दिन सब कुछ अच्छा रहता हैउस दिन नहीं जन्मती कोई कविता ।जैसे कल रात जल्दी सोया मैंऔर सुबह ही मां ने जगाया ।पूरे दिन सब कुछ वैसे ही चलता रहा …कक्षाएं, बेमतलब की पढ़ाई, दोस्त और भटकनें ।नहीं जन्...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
नवोत्पल
59


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