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नई हलचल

यादें..याद आतीं हैं

आज नए साल को शुरू हुए पूरे ११दिन हो चुके हैं.......वैसे तो लोग साल के आखिरी दिनों में ही साल भर का लेखा-जोखा कर लेते हैं.....लेकिन साल के आखिरी दिन मेरे लिए व्यस्तता से भरे हुए रहे.....ऐसा नहीं है कि मैं पा...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
87
अल्लम्...गल्लम्....बैठ निठ्ठ्लम्...
60

एक प्याला चाय....

मैक डोनाल्ड और पिज्जा हट की चका चौंध की ओर भागने वाली इस दुनिया में आज भी कहीं ऐसा कोना है जहाँ आपको सर और मैडम कहते नौजवान और नव युवती नहीं दिखेंगे और ना ही आपको खाने के लिए एक लम्बा किताबनुमा म...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Himanshu
आँगन.. जो बाहर होकर भीतर है
92

तन्हाई

ये वक़्त, ये तन्हाई और ये दीवानापन,हमें कही खा न जाये हमारा ये आवारापन !टूट गए है मोती हमारे ही हाथ से जिन्दगी के ,कि अब सहन नहीं होती दूजो के रिश्तो कि तपन !!...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Devendra Gehlod
Diary of poetry | Collection of poetry
95

कुछ स्याह ध्वनिया

अनमने मन से मै ,आत्मसंतुष्टि के द्वारा ,,अविलम्बित जीवन के, अनुत्तरित से प्रश्नों कोअचंभित हो कर देख रहा था ,,कर रहा था पूर्वालोकन ,,आलौकिक और आकस्मिक ध्वनियों का ,,जो प्रतिध्वनित हो रही थी,,मेरी ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Praveen
इदम् राष्ट्राय || इदम् न मम् ||
91

डॉ. झटका ....// Dr,Jhatka...

डॉ. झटकाडॉ.झटका , मेरे बचपन की मधुर स्मृतियों में से एक है , ये कॉमिक चरित्र लोटपोट और दीवाना में छपा करता था .. घसीटाराम और डॉ. झटका की जोड़ी , कॉमिक्स की दुनिया में बड़ी लोकप्रिय थी .. इसके कार्टूनिस...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
THE INDIAN COMICS भारतीय कॉमिक्स
125
ART BY VIJAYKUMAR SAPPATTI
120

संतरे की वो फांक..

"मम्मी देखो कितनी छोटी फांक है!"वो  संतरा खा रही थी और एक छोटी सी फांक पर उसकी नज़र पड़ी."बेटा उसे फेंक दे.""क्यों मम्मी?""क्योंकि ऐसी फांक खाने से.. तेरे पापा को भगवान् ले जाएगा.""अरे ऐसा क्यों होग...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Varsha Thakur
तमसो मा ज्योतिर्गमयः
77

और बरस एक बीत चला ,,,

और बरस एक बीत चला ,,,और बरस एक बीत चला ,,,सांसो का संगीत चला ,,,पिछली सब धूमिल यादे,,,अंकित करता अंकित करता,,,अपनों का ये मीत चला ,,,और बरस एक बीत चला ,,,सब मीठी वा तीखी यादे ,,,कुछ आधे कुछ पूरे वादे ,,,आगोसो में...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Praveen
इदम् राष्ट्राय || इदम् न मम् ||
109

مبارکباد

9 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
98

कब याद में तेरा साथ नहीं...

कब याद में तेरा साथ नहीं, कब हाथ में तेरा हाथ नहीं सद-शुक्र*1 के अपनी रातों में, अब हिज्र*2 की कोई रात नहीं मैदाने-वफ़ा दरबार नहीं, यां नामो-नसब*3 की पूछ कहाँ आशिक़ तो किसी का नाम नहीं, कुछ इश्‍क़ किसी ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
मेरी पसंद...
79

शाह अस्त हुसैन, बादशाह अस्त हुसैन

शाह अस्त हुसैन, बादशाह अस्त हुसैनदीन अस्त हुसैन, दीने-पनाह हुसैनसरदाद न दाद दस्त, दर दस्ते-यज़ीदहक़्क़ा के बिना, लाइलाह अस्त हुसैन-हज़रत ख़्वाजा मोईनुद्दीन हुस्ने-क़त्ल असल में मर्गे-यज़ीद ह...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
134

شاہ است حسین بادشاہ است حسین

خواجہ غریب نوازمعین الدین چشتی اجمیری علیہ رحمہ آپکی شان میں یوں رقم طراز ہیں کہ ۔شاہ است حسین بادشاہ است حسین دین است حسین دین پناہ است حسین سرداد نداد دست دردست یزید حقا کہ بنا ے لا الہ است حسیناقبال یوں گویا ہوئے کہ ۔ ۔ غریب و سادہ ورنگین ہے داستان حرمنہایت اس کی حسین ابتداءہ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
94

मै बिहार मे हूं और विकास तो अभी चालू हुआ है

ऐसे विकास हो रहा है बिहार काकुछ चुनिन्दा जगहों को छोर दे तो बहुत ऐसी जगह है जहाँ बुनियादी सुबिधा भी उपलब्ध नहीं है । इसमें कोई दो राइ नहीं की बिहार मे काफी कुछ बदला है मगर ये लोग क्या करे जब तलक ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Manish
ये सच है
107

नेताजी भूल भी नहीं भूल हीं जाते हैं

जरा सोचिये वो मंजर कैसा होगा जब कोई आपको मारनेके लिए बन्दुक ताने आपके सामने खड़ा होगा (कुछ भी बताना मुस्किल है )फिर उसके बन्दुक से दना-दनगोलीयां निकलती है और आपका बाल भी बांका नहीं होता है ,इसका ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Manish
ये सच है
86

चुस्तराम // CHUSTRAAM

चुस्तराम , मधुमुस्कान कॉमिक्स में छपने वाली एक जोड़ी चुस्तराम और सुस्तराम का LEAD CHARACTER है , इस श्रंखला को श्री जगदीश जी ने बनाया था और ये बहुत ही HIT रहा है , ये मेरे बचपन की मधुर यादो में से एक है ...CHUSTRAAM , IS A ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
THE INDIAN COMICS भारतीय कॉमिक्स
94

चेहरे // FACES

9 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
ART BY VIJAYKUMAR SAPPATTI
98

ये सच है: ऐसे भी चलती है दिल्ली मे ऑटो

ये सच है: ऐसे भी चलती है दिल्ली मे ऑटो...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Manish
ये सच है
80
Vivek Vaishnav
36

ऐसे भी चलती है दिल्ली मे ऑटो

ये कहानी दिल्ली के ऑटो की हैयु तो ऑटो मे सफ़र करने वालों का हर रोज ऑटो चालक से बहस होती है , लेकिन दिल्ली मे कुछ ऐसे जगह भी है जहाँ ये चुप-चाप सवारी बिठा कर निकल देते है, यदि कभी आप कश्मीरी गेट से सी...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Manish
ये सच है
90

ब्लॉग-जगत मे 'बात' : "बात की चूड़ी मर गई"

ब्लॉग-जगत मे 'बात' : "बात की चूड़ी मर गई"हम ब्लागर हैं. हम विचार चुनते हैं, बहुधा सोचते हैं..और देर-सबेर उसे पोस्ट मे तब्दील करते हैं..टिप्पणियाँ आती हैं...लोग कहते हैं कि चर्चा शुरू हो गई. अब हम टिप्पण...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
57
Vivek Vaishnav
37
अल्लम्...गल्लम्....बैठ निठ्ठ्लम्...
52

कौन कहता है कि 'पा' अमिताभ बच्चन की फिल्म है

पामें न अमिताभ दिखते हैं, न उनकी एक्टिंग की ऊंचाई। दरअसल, उस करेक्टर में अभिनय की गुंजाइश ही नहीं थी। अमिताभ की एक्टिंग देखनी हो तो ब्लैक जैसी दर्जनों फिल्में हैं। इसलिए कहना पड़ता है कि यह फि...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
अनुराग अन्वेषी
83

उसे बचाए कोई कैसे टूट जाने से

{श्री संदीप शर्मा 'साहिल' खबरों के छापेखाने के बाशिंदे हैं. दैनिक 'आज समाज' दिल्ली में crime reporting  की धांय-धांय के बीचोबीच दिल की धक्-धक् पर भी नज़र रख पाते हैं..एक बानगी पर आप भी गौर फरमाइए..!शीशे स...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
नवोत्पल
51

राम मेरा भाई तेरे राम से...

राम मेरा भाई तेरे राम सेइतना यार झगड़ता क्यों हैमेरे राम मुझे तारेंगेंतारें तुझे तेरे रघुवीरसहज-सरल सी बात है लेकिनतू फ़िर भी नहीं समझता क्यूँ हैराम मेरा भाई तेरे राम से....राग-द्वेष अपने अंतर्&nb...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
78

माँ की व्यथा

मेरी व्यथाअनकही सहीअनजानी नहीं हैमुझ जैसी हजारों नारियों कीकहानी यही है.जन्म से हीखुद कोअबला जानाजीवन के हर मोड़ परपरिजनों ने हीहेय माना.थी कितनी प्रफुल्लित मैंउस अनूठे अहसास सेरच बस रहा थ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Deepa Joshi
अल्प विराम
1

माँ

सच है माँ के कर्तव्य कभी ख़तम नहीं होते.. !डा. अनुराग जी की पोस्ट यथार्थ का क्रास वेरिफिकेशन पढ़ते हुए एक बेहद अच्छी कविता याद आ गयी जो मैंने कभी कादम्बिनी में पढी थी और जिसे राहुल राजे...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
56

श्रद्धांजलि

वो कल की ही तो है बातनहीँ बिछुड़ा था जबतुम्हारा व मेरा साथवो तुम्हारा शान्त चेहराथा जिस पर अनुशासन का पहराना हँसना ना हँसानासदा कुछ ना कुछ सिखानाकल ही तो खेले थे तुमकुछ पल मुझ संगमेरा रुठनाइ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Deepa Joshi
अल्प विराम
1

लेकॉनिक टिप्पणी का अभियोग ........ऐसा है क्या....? प्रेरणा : आदरणीय ज्ञानदत्त जी...

लेकॉनिक टिप्पणी का अभियोग ........ऐसा है क्या....? प्रेरणा : आदरणीय ज्ञानदत्त जी... भूमिका :आजकल व्यस्त हूँ, या यूँ कहें कुछ ऐसा ही रहना चाहता हूँ. मै जिस मध्यम स्तरीय पारिवारिक विन्यास से हूँ वहां अभ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
49


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