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Feet/Frm & Timecode Burn-In

Have telecine layoff a tape with a Blue Screen, Feet & Frame burn-in, Timecode Burn-in.1) Digitize this tape in to your project from the top of the hour.2) Create a Property of Title that includes: A number to go over the hour so that you can change this based on reel (ie Reel 4 would be 04); Reel and version; Property of (Studio); Initials (for who you send reel to) in the center of the screen - bring opacity to about 90% of the initials so they become a watermark.3) Put the Bluescreen and ...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
Deepak Kashyap
Post Production Standards
26

Tape Turnover Layout

Top of the Hour = Reel #. For this, we will use Reel 1 as an example.1) Stripe your tape starting at 58:002) 58:30-59:30 Bars & Tone3) 58:40-58:50 Slate (Show; In/Out; Track config; etc.)4) 01:00 - Program Start5) If you are turning over a Reel, FFOP should start at 01:00:08:00...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
Deepak Kashyap
Post Production Standards
26

Managing Tracks - Picture Editorial

One of the most important things you can do as a Picture Assistant, is to manage your tracks properly during the first cut and keep to that management. This makes turnover to the other Editing Departments much easier...and better for them as well. Here is a sample of how I do my shows:COLOR CODE YOUR CLIPS - Color coding SFX, MX, VFX, etc. a specific color in your bin when you bring these clips in, gives you a visual reference in your timeline.In Timeline Menu, make sure to check Source, Local...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
Deepak Kashyap
Post Production Standards
28

सपने भी सुंदर आयेगें...

संस्कारों से मिली थीउर्वरा धरती मुझेस्नेह का स्पर्श पाकरबाग पुष्पित हो गयाभावनाओं से पिरोयासूत में हर पुष्प कोमाला ना फ़िर भी बन सकीअर्पण जिसे मैं कर सकूँहे ईश सविनय आज तुमको----प्रयास भगीरथ ...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
103

एक कविता----मुंडेर पे छत की बैठ कबूतर गाते तो होंगे..

एक ब्लॉग पढ़ रहा था...शीर्षक था ...(ये खून के रिश्ते ) और नाम था..दिल के दरमियां.. तो ..मेरे जहन में एक कविता ने जन्म लिया...ये खून के रिश्ते दिल के दरमियां आते तो होंगे॥मुंडेर पे छत की बैठ कबूतर गाते तो ह...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
121

अपहरण...

अभी कुछ दिन पहलेकिसी अपने ने मुझसे कहाअरे अब तो आप भी हो गयेरीतेश होशंगाबादीमैं सोचने लगाअब कहाँ होती हैव्यक्ति की पहचान उसकेगाँव या शहर सेउसकी पहचानअब सिर्फ़ इससे हैकी वह आदमी है या औरतऔर हा...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
102

गालिब का एक शेर...........

बहुत दिनो के बाद आज आपसे मुखातिब हुये हैं......आज एक शेर...गालिब का एक शेर याद आ रहा है.....................हम कहां के दाना थे किस हुनर में यकता थेबेसबब हुआ दुश्मन गालिब आसमां अपना।हुई मुद्दत कि गालिब मर गया पर ...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
129

एक अच्छी कविता की नींव...

कुछ देर पहले ही की तो बात हैहर तरफ़ लगा हुआ था मेलाकोई भी नहीं था मेरे अंदर अकेलामिल रही थी ह्रदय को पर्याप्त वायुमन आश्वस्थ थाऔर कान भूल गये थे सन्नाटे की आवाजफ़िर रूक रूककर आने लगीं गहरी साँसे...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
109

मेरी रागिनी मनभावनी...

मेरी रागिनी मनभावनीमेरी कामिनी गजगामिनीजीवन के पतझड़ में मेरेतू है बनी मेरी सावनीशब्द सब खामोश थेबेरंग थी मन भावनासंगीतमय जीवन बनाजो तू बनी मेरी रागिनीआँखों को जो अच्छा लगेसुंदर कहे दुनिय...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
120

शेर और भैंस...

रोज-रोज की मारामारी से तंग आकरभैंसों ने सोचा चलो शेरों से संधि की जायेशेरों की जरूरत को ध्यान में रखते हुयेतय हुआ कि रोज दो भैंसें शेरों को सौंप दी जायेगींजानकर शेरों का चेहरा खिल गयासोचने लग...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
104

पति-पत्नी...

पति-पत्नीसाथ रहते रहतेकुछ-कुछ एकसा दिखने लगते हैंबहुत कुछ एकसा सोचने लगते हैंआजकल यह सोचकरवो जरा डर रहें हैंइसलिये चेहरे पर कमविचारों पर अधिकध्यान दे रहें हैं...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
118

मुझे जलाने में...

वो इतना जलते हैंफ़िर भी राख नहीं बनतेमैं सोचकर हैरान हूँथोड़ा परेशान हूँकितना जलना पड़ता होगा उन्हेंथोड़ा मुझे जलाने मेंआजकल नज़र उनकीहमसे नहीं मिलतीहमे देखते ही वोरास्ता बदल लेते हैंमैं सोचक...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
95

पृष्ठभूमि...

आजकल हर छोटी बड़ी बात परहो जाता है संघर्षबह जाता है खूनपहले की तरहअब कम ही निकलता हैबातचीत और शान्ति सेसमस्याओं का समाधानआज फ़िर दुर्योधन ठुकरा रहें हैंकृष्ण का शान्ति संदेशऔर बना रहें हैं बं...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
91

घुटन होती है मुझे...

आदमखोर शेर को मारने के लियेगाँव वालों की मेहनत से बने मचान सेबंदूकधारी हाथों को डर से काँपता देखकरघुटन होती है मुझेअन्याय की अट्टाहस सेमुकाबले के लिये तैयार निहत्थे लोगों सेमशीनगन लिये पुल...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
127

हमारी ही मुठ्ठी में...

प्रहार फ़िल्म का यह गीत निराशा के क्षणों में मुझे बहुत प्रेरणा देता है । नीचे दिये गये लिंक से आप भी इसे सुन सकतें हैं । लिंक पर जाकर गीत select करके play बटन पर click करें ।http://www.youtube.com/watch?v=MUmPjIxdAmEसाथ ही इस गीत के ब...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
मेरी पसंद...
110

इनपे भरोसा कभी ना करना

इनपे भरोसा समझो अपनी जान आफत में डालना है। यानिहमारे एक मित्र हैं चंदूलाल पालकीवाला। यही कोई पचास के लपेट में होंगे। अभी पिछले ही हफ्ते उनकी पालकी उठ गयी मतलब यम के दूत हमारे चंदू जी को उस स्थ...  और पढ़ें
11 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
104

बदले ढंग तो संग भी हैं बदले,......एक गज़ल

बदले ढंग तो संग भी हैं बदले,जीने के फिर हमारे रंग भी बदले॥हां हुये हैं कुछ - कुछ गमगीन हम ना चैन दिन में रातों को नींद कम॥और तो और ग़लतफहमियों के शिकार हो गये,दुनिया की नज़रों से दरकिनार हो गये॥श...  और पढ़ें
12 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
102

एक गजल

मौन हृदय से मेरे अब आवाज रुंधी सी आती हैआती है जब भी याद जी भरकर आती है...मसरुफ हैं वो तो मसरुफ हम भी हैं, ख्वाबों के भंवर में हर रात गुजर जाती है...परेशां रहोगे कब तलक ए बिखरे हुये नजारों बंजर अब ज़...  और पढ़ें
12 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
82

समाचार बाजार बनाता है....

निर्मल आंनद जी का आलेख पढ़ा ॥समाचार कौन बनाता है... मै इस बात से सहमत नही हूं कि शिल्पा-गेर प्रकरण किसी सोची समझी रणनीति का हिस्सा था। जिस समय ये खबर आयी उस समय ऑफिस मे मौजूद था। रात्रि के दस बज चु...  और पढ़ें
12 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
81

है दर्द मेरे दिल में.....

है दर्द मेरे दिल में , लबों पे ये हंसी हैं ,अंधेरों का सफर है, ना कोई रोशनी है। वक्त है कि कभी हमसफर ना बन सका जिंदगी बस यूं ही जिंदगी है, अंधेरों की तन्हाइयां है कि मै सफर में हूं गमों की खामोशियां ...  और पढ़ें
12 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
91

I longed for the स्टार्स........

I longed for the starsDwelling far and far AwayI cud only findBut a baffling wayI longed for the sunGlowing and SplashingI could only feelMy hands burningI longed for the dreamsThat were not trueI could only feel only blueThough I have a Heartshattered, Gloomy eyesYet I will long for All Skies ........  और पढ़ें
12 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
97

सपने..जो अक्सर टूट जाया करते हैं......

खामोश शाम के साथ -साथसपने भी चले आतें हैं। बिस्तर पर लेटते हीघेर लेते हैं मुझे और नोचने लगते है अपने पैने नाखूनो से ..जैसे चीटियों के झुंड में कोई मक्खी फंस गयी हो घर , कार, कम्प्यूटर, म्यूजिक सि...  और पढ़ें
12 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
84

मैं तो मजबूर हूं तुम तो होश में आयो यारों........

मैं तो मजबूर हूं तुम तो होश में आयो यारों इस मदहोश ज़माने को होश में लायो यारों जिंदगी उनकी भी बड़ी कीमत वाली हैउनकी आंखों में भी ईद , दिवाली है।भूख की आग हर शाम दहकती है,हर रोज़ वो मासूम बिलखती ह...  और पढ़ें
12 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
94

ये रात बरसने वाली है......

ये रात बरसने वाली है।निस्तब्ध किरण,घनघोर घटाये रात बरसने वाली है।निस्तेज चंद्र पर काल कलिमातम अधरों पर लाली है। ये रात बरसने वाली है।.........पलकों पर थिरकते है आंसूउमंग हृदय से खाली है।पत्तों प...  और पढ़ें
12 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
94

ग़म-ए-जिंदगी--

ग़म-ए-जिंदगी के हमसफर आंसुओं,बस छोटी सी एक बात बना दो,संगदिल मेरे दिल को कर दो,जज्बातों को फौलाद बना दो। न सोचूं न चाहूं ना मुलाकात हो न करवट ही बदलूं न कोई याद हो। बिछड़े तो हमको गरज़ है ...  और पढ़ें
12 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
80

जिंदगी तेरी मदहोश नज़रों के सिवा कुछ भी नही....

जिंदगी तेरी मदहोश नज़रों के सिवा कुछ भी नहीजिंदगी तेरी बाहों के सिवा कुछ भी नही जिंदगी अल्फाज़ हैं तेरी खा़मोश मोहब्बत के जिंदगी नाज़ हैं तेरी जुनुन ए सोहबत के जिंदगी तेरे लबों पे तैरती मुस्...  और पढ़ें
12 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
90

काश ये मति पहले आ जाती

आज ही अखवार में बड़ी रोचक खबर है कि हरियाणा में २८ गावों के लोगों ने क्रिकेट खेलने पर प्रकिबंध लगाने का फैसला किया है। हर गांव में दो लोगों की कमेटी इस बात पर नजर रखेगी कि कोई बच्चा या बड़ा क्रि...  और पढ़ें
12 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
101

कोई झामपटाखा खबर है क्या....

पहले पहल खबरों की दुनिया में आया तो तमाम तरह जुमलों से दो चार हुआ। जुमले ऐसे कि सुनकर लगे मानो आलू की टिक्की की चाट में मिर्ची ज्यादा पड़ गयी हों। ये जुमले जब कानों के पर्दों पर पड़ते है तो लगता ...  और पढ़ें
12 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
84

टीवी पर चटनी

यूं तो चटनी सभी को भाती है। लेकिन आजकल सारे टीवी चैनल्स भी हमे चटनी ही तो परोसने का परोपकारी कार्य कर रहे हैं। खासकर खबरिया चैनल्स। कहने को तो, लोगों तक असली खबरों को पहुंचाने के लम्बरदार हैं ल...  और पढ़ें
12 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
83

ऐसा क्यों ?

हंसी एक रोज मैने तन्हा देखीमैं कुछ पूछता, उससे पहले हीआंखों में उमड़ता सैलाब,उपेक्षा की सारी कहानी बयां कर रहा थाऔर स्वयं पूछ रहा थाऐसा क्यों ? ऐसा क्यों ?मैं निशब्द , निरुत्तर,बस सोच रहा था ऐसा ...  और पढ़ें
12 वर्ष पूर्व
सचिन
कभी कभी
92


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