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हम बड़े क्यों हो गए

 PINTEREST IMAGE.तुम्हारे आलिंगन में आज वो अनुभव नहीं रहा,तुम्हारे अनुभवों मेंअब वो मिठास नहीं रही.पहले तो नहीं आते थे ऐसेजैसे कि तुम्हारा आनाकोई बहुत बड़ी बात हो.वो तुम्हारेछोटे-छोटे गिफ्ट्समुट्ठी...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Abhilasha
@Abhi
3

स्मरण

   जुलाई 28, 2014, प्रथम विश्व-युध्द के आरंभ की सौवीं जयंती थी। ब्रिटिश मीडिया में, 4 वर्ष तक चलने वाले इस संघर्ष की जयंती के उपलक्ष में, अनेकों चर्चाएं और वृतचित्र प्रसारित किए गए। एक टी.वी. कार्यक...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Roz Ki Roti
रोज़ की रोटी - Daily Bread
3

हम आप जिस तरह की दुनिया में रह रहे हैं, जिंदगीभर सतर्क रहने की जरूरत है, वरना इसकी भारी कीमत चुकानी होगी

हरेश कुमारजिस प्रकार से एक बीज से पौधा बनने की प्रक्रिया तक हमेशा संरक्षण और देखभाल की जरूरत होती है ठीक उसी तरह से एक बच्चे को शिशु से युवावस्था तक हमेशा सही देखभाल की जरूरत पड़ती है। कहीं भी ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Haresh
Information2media
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साल के बारह महीने - बालगीत 74

बारह माह साल के होतेयाद न हों रिकू जी रोतेजनवरी फरवरी मार्च के नामरखे याद जो दे एग्जामअप्रिल मई जून जब आतेगर्मी के संग लू भी लातेमाह जुलाई अगस्त सितम्बरबरखा आती झूम झूमकरअक्टूबर और माह नवंबर...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
bhavna pathak
bhonpooo.blogspot.com
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चौदह दोहे "जय हिन्दी-जय नागरी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हिन्दी का अवसान है, अँगरेजी की भोर।इसीलिए तो देश में, हिन्दी है कमजोर।।हम हिन्दी के जिगर में, घोंप रहे शमशीर।अपनी भाषा का स्वयं, खींच रहे हम चीर।।भारत को अब इण्डिया, हम सब रहे पुकार।हिन्दी ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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हम दोनों एक ही बिरादरी के है और बिरादरी वाले से मज़दूरी नहीं लिया करते- प्रभु श्रीराम और निषादराज केवट संवाद

जब केवट प्रभु के चरण धो चूका तो भगवान कहते है - भाई ! अब तो गंगा पार करा दे,इस पर केवट कहता है प्रभु नियम तो आपको पता ही है कि जो पहले आता है उसे पहले पार उतारा जाता है इसलिए प्रभु अभी थोडा और रुक...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Haresh
Information2media
5

इंटेलीजेंट लोग इन सवालों का जवाब जरूर दें

इस तस्वीर में दिख रही चार खूबसूरत लड़कियों को ध्यान से देखिये, और देखकर क्या आप बता सकते हैं तो बताइये कि इस तस्वीर क्या गलती है?ऐसी कौन सी चीज़ है जिसे लड़कियां खाती भी हैं और पहनती भी हैं?क्या आप ब...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
shweta
offbeat news
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शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (१३)

शाम खामोश होने को है और रात गुफ्तगू करने को आतुर ... इस छत पर काफी शामें ऐसी ही बीत जाती हैं ...आसमां को तकते हुए .... सामने पहाड़ी पर वो पेड़ आवाज लगाते हैं ..कुछ उड़ते परिदों को ..आओ ! बसेरा मिलेगा तुम्हें .....  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
सु-मन (Suman Kapoor)
बावरा मन
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चिड़िया: पाषाण

चिड़िया: पाषाण: पाषाण सुना है कभी बोलते, पाषाणों को ? देखा है कभी रोते , पाषाणों को ? कठोरता का अभिशाप, झेलते देखा है ? बदलते मौसमों से, जूझते द......  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
4

स्कूल में बच्चे की ह्त्या - २ कवितायें

1.ये जो तुमने मौत ओढ़ाई है मुझेकितनी लाचार है अपनी कोशिशों में.मै तो अब भी ज़िंदा हूँ तुम्हारे खून से सने हाथों में ,तुम्हारे दुधमुहे बच्चे की बोतल में मेरी साँसे बंद हैंऔर तुम्हारी पत्नी की मुस्...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Aparna Bajpai
Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध )
4

SHE

                          SHEWith broken pieces of what once were dreams.Her soul was on fire and made terrible screams..Her eyes were closed, her tears very fiery streams...She's done, She's gone, She's no more.Her boat has sailed Long ago from the seashore..Now she's in a place new, with a white marble door...She forgave everyone because her heart was pure.But beware wrongdoers, for karma is for sure..Once it takes hold...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
राकेश श्रीवास्तव
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दूभर जीवन

उस छोटी सी चिड़ियाँ का जीवन कितना दूभर?चातुर नजरों से देखती इधर-उधर,मन ही मन हो आतुर सोचती करती फिकर....मीलों होगे आज फिर उड़ने,अधूरे काम बहुत से होंगे करने,आबो-दाना है कहाँ न जाने?मिटेगी भूख न जान...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
पुरूषोत्तम कुमार सिन्हा
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सरकारी बंद लिफ़ाफ़ा

एक एनजीओ की याचिका पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार को  आदेश दिया  केन्द्रीय  प्रत्यक्ष कर बोर्ड  ने कल 105 क़ानून बनाने वाले आदरणीयों (?) के नाम सीलबंद लिफ़ाफ़े में सौं...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
kuldeep thakur
कविता मंच।
0

RITU MAHESHWARI IAS - देश में अरबों रुपयों की बिजली चोरी रोकने का रास्ता दे गई यह महिला आईएएस

गाजियाबाद की डीएम रितु माहेश्वरी।देश में हर साल करीब 64,000 करोड़ रुपये की बिजली चोरी हो जाती है। रितु माहेश्वरी नाम की एक महिला नौकरशाह सरकारी खजाने को हो रहा इतना बड़ा नुकसान रोकने में दिलोजान...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Praveen Gupta
हमारा वैश्य समाज - HAMARA VAISHYA SAMAJ
7

वैश्य समाचार

साभार: दैनिक भास्कर सूरत ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Praveen Gupta
हमारा वैश्य समाज - HAMARA VAISHYA SAMAJ
3

RITU JAYASWAL - ऋतू जायसवाल - वैश्य गौरव

साभार: दैनिक जागरण ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Praveen Gupta
हमारा वैश्य समाज - HAMARA VAISHYA SAMAJ
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कविता "ज्येष्ठ पुत्र नितिन का जन्मदिन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जन्मदिवस की बेला पर, आशीष तुम्हें मैं देता।जीवन के क्रीड़ांगन में, तुम बहकर रहो विजेता।संस्कार की नींव हमेशा, अपने बच्चों में डालो।जैसे मैंने पाला तुमको, वैसे ही तुम भी पालो।।जीवनसाथ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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789..विचरने लगे हैं लक्ष्यविहीन तर्क...

उषा स्वस्तिआज़ यानी १ ३ सितंबर, दिन बुधवार है..लिंको के माध्यम से रू-ब-रू होते हैं आज के रचनाकारों सेजिनके नामों को क्रमानुसार इस प्रकार से पढें.जेन्नी शबनम जी, उदय वीर सिंह जी, शशि पुरवार जी,...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Yashoda Agrawal
पाँच लिंकों का आनन्द
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दोनों को अधूरा छोड़ दिया.....फैज अहमद फैज

वो लोग बहुत खुशकिस्‍मत थेजो इश्‍क को काम समझते थेया काम से आशिकी रखते थेहम जीते जी नाकाम रहेना इश्‍क किया ना काम कियाकाम इश्‍क में आड़े आता रहाऔर इश्‍क से काम उलझता रहाफिर आखिर तंग आकर हमनेदो...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Yashoda Agrawal
मेरी धरोहर
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प्रद्युम्न, अब तुम कभी नहीं आओगे!

GOOGLE IMAGE अक्सर छोटे बच्चे स्कूल जाते वक्त अपनी माँ को इन बोलों की थपकी दे जाते हैं,'माँ, मैं जा रहा हूँतुम अकेले रहोगी न घर पर,डरना मत!यहीं दरवाजे पर इंतज़ार करना...'माँ कितने भी काम निपटा लेपर उसकी चौक...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Abhilasha
@Abhi
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विरक्ति....

वो मेरा ही था जिसे मैं मेरा भूतकाल कहती हूँ ख़ुशी के दिन थे, आकाश से मन भर की हुई बातें थी ,चाँदनियां दोस्त हुआ करती थी। दर्द भी थे ,कुछ वहम भी , कुछ रचे-गढ़े बादल के टुकड़े थे जिन्हे  मैं सपने कहा करत...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Dr.Radhika Budhkar
आरोही
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घमण्ड और नम्रता

   कुछ समय पहले की बात है, मैं अपनी पत्नि के साथ कुछ दिन कैम्पिंग के लिए गया, जहाँ हम एक प्राकृतिक खुले इलाके में तंबुओं में रहते थे। एक संध्या को अपने कैम्प की ओर लौटते समय हमने पास के घास के म...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Roz Ki Roti
रोज़ की रोटी - Daily Bread
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जागते रहो ... भावना की मीडिया क्लास 32

आप ऑफिस से थके-मांदे आएं या किसी वजह से कितने ही परेशान क्यूँ न हों, बच्चों का खिलखिलाता चेहरा, भोली सूरत और उनकी मनमोहक बातें सुनकर सारी थकान दूर हो जाती है और कुछ देर के लिए ही सही सारी टेंशन ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
bhavna pathak
bhonpooo.blogspot.com
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भारत के साथ मिलकर ही चलने में चीन की भलाई है

हरेश कुमारहकीकत तो यह कि चीन की भलाई भारत के साथ मिलकर चलने में ही है, नहीं तो इसका इतना नुकसान होगा जो उसकी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने के लिए काफी है। चाहे साउथ चाइना सी का मामला हो या पड़ोसी द...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Haresh
Information2media
5

इस पुरानी फोटो में है तीन-तीन बॉलीवुड के सुपरस्टार्स, पहचानिये तो जरा

किसी ने बहुत खूब कहा है कि तस्वीरें यादों का आइना होती हैं। इस लिए लोग पुरानी तस्वीरों को देखकर भावुक हो जाते हैं। यादें अच्छी हों या बुरी कोई तस्वीर देखते ही उस से जुडी याद ताज़ा हो जाती है। ऐसी...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
shweta
offbeat news
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Laxmirangam: दीपा

Laxmirangam: दीपा: दीपा हर दिन की तरह मुंबई की लोकल ट्रेन खचाखच भरी हुई थी. यात्री भी हमेशा की तरह अंदर बैठे , खड़े थे. गेट के पास कुछ यात्री हेंडल पकड़े ......  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
3

Laxmirangam: दीपा

Laxmirangam: दीपा: दीपा हर दिन की तरह मुंबई की लोकल ट्रेन खचाखच भरी हुई थी. यात्री भी हमेशा की तरह अंदर बैठे , खड़े थे. गेट के पास कुछ यात्री हेंडल पकड़े ......  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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ये है Algorithm of Death, इसी से तय होती है व्यक्ति की अधिकतम आयु और मृत्यु, जानिए वैज्ञानिक तथ्य

मृत्यु ही जीवन का एकमात्र सत्य है, जो पैदा हुआ है उसे एक दिन मरना ही है। लेकिन हम बात कर रहे हैं वृद्ध हो कर स्वयं मरने की। ऐसा क्या है जिसकी वजह से लोग बूढ़े होते है और अंत में पता चलता है कि शरीर त...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
shweta
offbeat news
4


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