SATYAN SRIVASTAVA
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विपिनचंद्र पाल (सरायभारती)
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रुद्राभिषेक का महत्त्व तथा लाभ भगवान शिव के रुद्राभिषेक से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है साथ ही ग्रह जनित दोषों और रोगों से शीघ्र ही मुक्ति मिल जाती है। 9956047166,ved prakash Tripathi
आज दिनांक १६/०७/२०१७को पार्थिव शिव लिंग में रुद्राभिषेक के समय पूजन मिर्जापुर के लालगंज में यजमान दशरथ केशरवानी जी के द्वारा पंच दिवसीय रूद्राभिषेक अनुष्ठान् कार्य दिनांक १३/०७/२०१७को प्रारम्भ हुआ आज अनुष्ठान् का चतुर्थ दिवस १७/०७/२०१७ को इस अनुष्ठान् की पूर्णाहुति होगी भूतभावन भगवान की जय.. आचार्य वेद प्रकाश त्रिपाठी मो.९९५६०४७१६६ email. vedprakashtripathiji@gmail.
*हाथ की पांच उंगलिया*
वेद ज्योतिष परामर्श केन्द्र प्रयाग (हैप्पी बसंत पंचमी)
Vedprakashtripathiji@gmail.com वेद ज्योतिष परामर्श केन्द्र प्रयाग
Vedprakashtripathiji@gmail.com
$$$$$$$$बिनैका बाबा धाम$$$$$$$$$$ श्री बिनैका बाबा मंदिर। आदर्श ग्राम हन्ना बिनैका मऊ चित्रकूट उत्तरप्रदेश भारत चित्रकूट धाम कर्वी जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित है प्रसिद्ध सिद्ध स्थल श्री बिनैका बाबा का मंदिर है यहा हजारों वर्ष पहले हमारे गांव के एक हनुमान नाम के महान संत को रात्रि के समय स्वप्न हुआ प्रातः जाकर खुदाई प्रारम्भ कर दिया कुछ नीचे जाने पर एक पत्थर की शिला दिखी उसे निकालने पर वह मूर्ति हनुमान जी की थी गॉव का नाम हन्ना विनैका होने के कारण उनका नाम विनैका बाबा रखा गया फिर गाव के द्वारा स्थापित किया गया था। ऊंची पहाड़ियों एवम यमुना नदी से लगभग २ किलोमीटर दूर के किनारे पर स्थित इस मंदिर में अति प्राचीन उत्तर मुखी हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित है। बिनैका बाबा का यह स्थान सातवीं शताब्दी पूर्व का है और साधू संतों की तपो भूमि का केन्द्र रहा है। यहाँ पर प्रति बर्ष चेती पूर्णिमा (हनुमान जयंती) और मंगलवार /- शनिवार पर विशाल मेले व भन्डारे का आयोजन होता है, जिसमे दूर दूर पूरे भारत से लाखो लोग दर्शन के लिए आते है, यहाँ पर जो लोग सच्चे मन से मनोकामना मांगते हैं विनैका बाबा की कृपा से सभी मनोकामना पूर्ण होती है। इसके साथ यहाँ सिद्ध शंकर जी एवं भैरव बाबा का भी मंदिर है।वही गाँव के बीचो बीच हरिना देवी ( हिगंलाजमाता )का मन्दिर है जिन लोगो को संतान नहीं होती वो यहाँ आकर मनोकामना मागते हैं और सिद्ध बाबा एवं माता जी की कृपा से उनकी मनोकामना पूरी होती है। बताया जाता है कि हरिना देवी ( हिगंलाजमाता) और बिनैका बाबा के नाम से ही ये गाँव जाना जाता है ये देवी कुछ सालो से हन्ना विनैका से दूर हो गई थीं मगर अब उनके प्रताप तेज के कारण भक्त जानते हैं और अपने शक्ति से भक्तों का कल्याण करती हैं इन्हीं के नाम से पहले गांव का नाम हरिणा था समय के अनुसार गांव का नाम हन्नाविनैका हुआ आने जाने की (यतायात सुविधा) मानिकपुर या कर्वी तक ट्रेन से वहा से बस या टैक्सी से लालतारोड चौराहा वहा से जीप या आटो से 10रू.देकर बिनैका बाबा धाम हन्ना बिनैका आ सकते हैं आप अपने निजी वाहन से भी आ जा सकते है या बस या ट्रेन से भी आ सकते है ग्राम हन्ना बिनैका ब्लाक रामनगर तहसील ( मऊ ) चित्रकूट बाँदा उत्तर प्रदेश भारत
बधाई
एकगीत
आचार्य पं. वेद प्रकाश त्रिपाठी (इलाहाबाद) मो.9956047166,9450281602, ॐ : ओउम् तीन अक्षरों से बना है। अ उ म् । "अ" का अर्थ है उत्पन्न होना,
कृष्ण जी की सोलह कला के विषय में जानें
!! श्रीरेणुकास्तोत्रम् !!
।।श्रीसरस्वतीस्तोत्रम्।।
पितृ पक्ष श्राद्ध 2016 पितृ पक्ष का महत्व
जानिए महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित 18 पुराणों के बारें में पुराण शब्द का अर्थ है प्राचीन कथा। पुराण विश्व साहित्य के प्रचीनत्म ग्रँथ हैं। उन में लिखित ज्ञान और नैतिकता की बातें आज भी प्रासंगिक, अमूल्य तथा मानव सभ्यता की आधारशिला हैं। वेदों की भाषा तथा शैली कठिन है। पुराण उसी ज्ञान के सहज तथा रोचक संस्करण हैं। उन में जटिल तथ्यों को कथाओं के माध्यम से समझाया गया है। पुराणों का विषय नैतिकता, विचार, भूगोल, खगोल, राजनीति, संस्कृति, सामाजिक परम्परायें, विज्ञान तथा अन्य विषय हैं। महृर्षि वेदव्यास ने 18 पुराणों का संस्कृत भाषा में संकलन किया है। ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश उन पुराणों के मुख्य देव हैं। त्रिमूर्ति के प्रत्येक भगवान स्वरूप को छः पुराण समर्पित किये गये हैं। आइए जानते है 18 पुराणों के बारे में। 1.ब्रह्म पुराण ब्रह्म पुराण सब से प्राचीन है। इस पुराण में 246 अध्याय तथा 14000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में ब्रह्मा की महानता के अतिरिक्त सृष्टि की उत्पत्ति, गंगा आवतरण तथा रामायण और कृष्णावतार की कथायें भी संकलित हैं। इस ग्रंथ से सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर सिन्धु घाटी सभ्यता तक की कुछ ना कुछ जानकारी प्राप्त की जा सकती है। 2.पद्म पुराण पद्म पुराण में 55000 श्र्लोक हैं और यह ग्रंथ पाँच खण्डों में विभाजित है जिन के नाम सृष्टिखण्ड, स्वर्गखण्ड, उत्तरखण्ड, भूमिखण्ड तथा पातालखण्ड हैं। इस ग्रंथ में पृथ्वी आकाश, तथा नक्षत्रों की उत्पति के बारे में उल्लेख किया गया है। चार प्रकार से जीवों की उत्पत्ति होती है जिन्हें उदिभज, स्वेदज, अणडज तथा जरायुज की श्रेणा में रखा गया है। यह वर्गीकरण पुर्णत्या वैज्ञायानिक है। भारत के सभी पर्वतों तथा नदियों के बारे में भी विस्तरित वर्णन है। इस पुराण में शकुन्तला दुष्यन्त से ले कर भगवान राम तक के कई पूर्वजों का इतिहास है। शकुन्तला दुष्यन्त के पुत्र भरत के नाम से हमारे देश का नाम जम्बूदीप से भरतखण्ड और पश्चात भारत पडा था। 3.विष्णु पुराण विष्णु पुराण में 6 अँश तथा 23000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में भगवान विष्णु, बालक ध्रुव, तथा कृष्णावतार की कथायें संकलित हैं। इस के अतिरिक्त सम्राट पृथु की कथा भी शामिल है जिस के कारण हमारी धरती का नाम पृथ्वी पडा था। इस पुराण में सू्र्यवँशी तथा चन्द्रवँशी राजाओं का इतिहास है। भारत की राष्ट्रीय पहचान सदियों पुरानी है जिस का प्रमाण विष्णु पुराण के निम्नलिखित शलोक में मिलता हैः उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तद भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः। (साधारण शब्दों में इस का अर्थ है कि वह भूगौलिक क्षेत्र जो उत्तर में हिमालय तथा दक्षिण में सागर से घिरा हुआ है भारत देश है तथा उस में निवास करने वाले सभी जन भारत देश की ही संतान हैं।) भारत देश और भारत वासियों की इस से स्पष्ट पहचान और क्या हो सकती है? विष्णु पुराण वास्तव में ऐक ऐतिहासिक ग्रंथ है। 4.शिव पुराण शिव पुराण में 24000 श्र्लोक हैं तथा यह सात संहिताओं में विभाजित है। इस ग्रंथ में भगवान शिव की महानता तथा उन से सम्बन्धित घटनाओं को दर्शाया गया है। इस ग्रंथ को वायु पुराण भी कहते हैं। इस में कैलाश पर्वत, शिवलिंग तथा रुद्राक्ष का वर्णन और महत्व, सप्ताह के दिनों के नामों की रचना, प्रजापतियों तथा काम पर विजय पाने के सम्बन्ध में वर्णन किया गया है। सप्ताह के दिनों के नाम हमारे सौर मण्डल के ग्रहों पर आधारित हैं और आज भी लगभग समस्त विश्व में प्रयोग किये जाते हैं। 5.भागवत पुराण भागवत पुराण में 18000 श्र्लोक हैं तथा 12 स्कंध हैं। इस ग्रंथ में अध्यात्मिक विषयों पर वार्तालाप है। भक्ति, ज्ञान तथा वैराग्य की महानता को दर्शाया गया है। विष्णु और कृष्णावतार की कथाओं के अतिरिक्त महाभारत काल से पूर्व के कई राजाओं, ऋषि मुनियों तथा असुरों की कथायें भी संकलित हैं। इस ग्रंथ में महाभारत युद्ध के पश्चात श्रीकृष्ण का देहत्याग, द्वारिका नगरी के जलमग्न होने और यदु वंशियों के नाश तक का विवरण भी दिया गया है। 6.नारद पुराण नारद पुराण में 25000 श्र्लोक हैं तथा इस के दो भाग हैं। इस ग्रंथ में सभी 18 पुराणों का सार दिया गया है। प्रथम भाग में मन्त्र तथा मृत्यु पश्चात के क्रम आदि के विधान हैं। गंगा अवतरण की कथा भी विस्तार पूर्वक दी गयी है। दूसरे भाग में संगीत के सातों स्वरों, सप्तक के मन्द्र, मध्य तथा तार स्थानों, मूर्छनाओं, शुद्ध एवं कूट तानो और स्वरमण्डल का ज्ञान लिखित है। संगीत पद्धति का यह ज्ञान आज भी भारतीय संगीत का आधार है। जो पाश्चात्य संगीत की चकाचौंध से चकित हो जाते हैं उन के लिये उल्लेखनीय तथ्य यह है कि नारद पुराण के कई शताब्दी पश्चात तक भी पाश्चात्य संगीत में केवल पाँच स्वर होते थे तथा संगीत की थ्योरी का विकास शून्य के बराबर था। मूर्छनाओं के आधार पर ही पाश्चात्य संगीत के स्केल बने हैं। 7.मार्कण्डेय पुराण अन्य पुराणों की अपेक्षा यह छोटा पुराण है। मार्कण्डेय पुराण में 9000 श्र्लोक तथा 137 अध्याय हैं। इस ग्रंथ में सामाजिक न्याय और योग के विषय में ऋषिमार्कण्डेय तथा ऋषि जैमिनि के मध्य वार्तालाप है। इस के अतिरिक्त भगवती दुर्गा तथा श्रीक़ृष्ण से जुड़ी हुयी कथायें भी संकलित हैं। 8.अग्नि पुराण अग्नि पुराण में 383 अध्याय तथा 15000 श्र्लोक हैं। इस पुराण को भारतीय संस्कृति का ज्ञानकोष (इनसाईक्लोपीडिया) कह सकते है। इस ग्रंथ में मत्स्यावतार, रामायण तथा महाभारत की संक्षिप्त कथायें भी संकलित हैं। इस के अतिरिक्त कई विषयों पर वार्तालाप है जिन में धनुर्वेद, गान्धर्व वेद तथा आयुर्वेद मुख्य हैं। धनुर्वेद, गान्धर्व वेद तथा आयुर्वेद को उप-वेद भी कहा जाता है। 9.भविष्य पुराण भविष्य पुराण में 129 अध्याय तथा 28000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में सूर्य का महत्व, वर्ष के 12 महीनों का निर्माण, भारत के सामाजिक, धार्मिक तथा शैक्षिक विधानों आदि कई विषयों पर वार्तालाप है। इस पुराण में साँपों की पहचान, विष तथा विषदंश सम्बन्धी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गयी है। इस पुराण की कई कथायें बाईबल की कथाओं से भी मेल खाती हैं। इस पुराण में पुराने राजवँशों के अतिरिक्त भविष्य में आने वाले नन्द वँश, मौर्य वँशों, मुग़ल वँश, छत्रपति शिवा जी और महारानी विक्टोरिया तक का वृतान्त भी दिया गया है। ईसा के भारत आगमन तथा मुहम्मद और कुतुबुद्दीन ऐबक का जिक्र भी इस पुराण में दिया गया है। इस के अतिरिक्त विक्रम बेताल तथा बेताल पच्चीसी की कथाओं का विवरण भी है। सत्य नारायण की कथा भी इसी पुराण से ली गयी है। 10.ब्रह्म वैवर्त पुराण ब्रह्माविवर्ता पुराण में 18000 श्र्लोक तथा 218 अध्याय हैं। इस ग्रंथ में ब्रह्मा, गणेश, तुल्सी, सावित्री, लक्ष्मी, सरस्वती तथा क़ृष्ण की महानता को दर्शाया गया है तथा उन से जुड़ी हुयी कथायें संकलित हैं। इस पुराण में आयुर्वेद सम्बन्धी ज्ञान भी संकलित है। 11.लिंग पुराण लिंग पुराण में 11000 श्र्लोक और 163 अध्याय हैं। सृष्टि की उत्पत्ति तथा खगौलिक काल में युग, कल्प आदि की तालिका का वर्णन है। राजा अम्बरीष की कथा भी इसी पुराण में लिखित है। इस ग्रंथ में अघोर मंत्रों तथा अघोर विद्या के सम्बन्ध में भी उल्लेख किया गया है। 12.वराह पुराण वराह पुराण में 217 स्कन्ध तथा 10000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में वराह अवतार की कथा के अतिरिक्त भागवत गीता महामात्या का भी विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। इस पुराण में सृष्टि के विकास, स्वर्ग, पाताल तथा अन्य लोकों का वर्णन भी दिया गया है। श्राद्ध पद्धति, सूर्य के उत्तरायण तथा दक्षिणायन विचरने, अमावस और पूर्णमासी के कारणों का वर्णन है। महत्व की बात यह है कि जो भूगौलिक और खगौलिक तथ्य इस पुराण में संकलित हैं वही तथ्य पाश्चात्य जगत के वैज्ञिानिकों को पंद्रहवी शताब्दी के बाद ही पता चले थे। 13.स्कन्द पुराण स्कन्द पुराण सब से विशाल पुराण है तथा इस पुराण में 81000 श्र्लोक और छः खण्ड हैं। स्कन्द पुराण में प्राचीन भारत का भूगौलिक वर्णन है जिस में 27 नक्षत्रों, 18 नदियों, अरुणाचल प्रदेश का सौंदर्य, भारत में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों, तथा गंगा अवतरण के आख्यान शामिल हैं। इसी पुराण में स्याहाद्री पर्वत श्रंखला तथा कन्या कुमारी मन्दिर का उल्लेख भी किया गया है। इसी पुराण में सोमदेव, तारा तथा उन के पुत्र बुद्ध ग्रह की उत्पत्ति की अलंकारमयी कथा भी है। 14.वामन पुराण वामन पुराण में 95 अध्याय तथा 10000 श्र्लोक तथा दो खण्ड हैं। इस पुराण का केवल प्रथम खण्ड ही उपलब्ध है। इस पुराण में वामन अवतार की कथा विस्तार से कही गयी हैं जो भरूचकच्छ (गुजरात) में हुआ था। इस के अतिरिक्त इस ग्रंथ में भी सृष्टि, जम्बूदूीप तथा अन्य सात दूीपों की उत्पत्ति, पृथ्वी की भूगौलिक स्थिति, महत्वशाली पर्वतों, नदियों तथा भारत के खण्डों का जिक्र है। 15.कुर्मा पुराण कुर्मा पुराण में 18000 श्र्लोक तथा चार खण्ड हैं। इस पुराण में चारों वेदों का सार संक्षिप्त रूप में दिया गया है। कुर्मा पुराण में कुर्मा अवतार से सम्बन्धित सागर मंथन की कथा विस्तार पूर्वक लिखी गयी है। इस में ब्रह्मा, शिव, विष्णु, पृथ्वी, गंगा की उत्पत्ति, चारों युगों, मानव जीवन के चार आश्रम धर्मों, तथा चन्द्रवँशी राजाओं के बारे में भी वर्णन है। 16.मतस्य पुराण मतस्य पुराण में 290 अध्याय तथा 14000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में मतस्य अवतार की कथा का विस्तरित उल्लेख किया गया है। सृष्टि की उत्पत्ति हमारे सौर मण्डल के सभी ग्रहों, चारों युगों तथा चन्द्रवँशी राजाओं का इतिहास वर्णित है। कच, देवयानी, शर्मिष्ठा तथा राजा ययाति की रोचक कथा भी इसी पुराण में है 17.गरुड़ पुराण गरुड़ पुराण में 279 अध्याय तथा 18000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में मृत्यु पश्चात की घटनाओं, प्रेत लोक, यम लोक, नरक तथा 84 लाख योनियों के नरक स्वरुपी जीवन आदि के बारे में विस्तार से बताया गया है। इस पुराण में कई सूर्यवँशी तथा चन्द्रवँशी राजाओं का वर्णन भी है। साधारण लोग इस ग्रंथ को पढ़ने से हिचकिचाते हैं क्योंकि इस ग्रंथ को किसी परिचित की मृत्यु होने के पश्चात ही पढ़वाया जाता है।
*दामोदर की दीवानी दुनिया*आचार्य पं. वेद प्रकाश त्रिपाठी (इलाहाबाद)मो.9956047166
*गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस में प्रभु श्रीराम और माता सीता का एक ऐसा प्रसंग बताया गया है, जो प्रत्येक दम्पति के लिए जानना आवश्यक है।*
आचार्य पं. वेद प्रकाश त्रिपाठी (इलाहाबाद) मो.9956047166,*✍🏻 मॉडर्न कविता ✍🏻* ___________________________________________
❗ *जनम जनम मुनि जतन कराहीं* *अन्त राम कहि आवत नाहीं*❗
आचार्य पं. वेद प्रकाश त्रिपाठी (इलाहाबाद) मो.9956047166,9450281602, पुत्र या पुत्री प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण नियम। ___________________________________________
*"प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली"*
मानव जीवन में उपयोगी व कल्याणकारी तथ्य
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